डोगरी और पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने के लिए जम्मू में विशेष कार्यक्रम आयोजित
डोगरी और पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने के लिए जम्मू में विशेष कार्यक्रम आयोजित

Post by : Himachal Bureau

May 19, 2026 1:05 p.m. 113

जम्मू के केएल सहगल हॉल में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने स्वर्गीय चंदन नेगी द्वारा लिखित डोगरी-पंजाबी शब्दकोश का विमोचन किया। यह कार्यक्रम पंजाबी लेखक सभा और जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में साहित्य, भाषा और संस्कृति से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर राज्यपाल ने साहित्य और भाषाओं के महत्व को लेकर अपने विचार भी साझा किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि साहित्य समाज को नई दिशा देने का काम करता है। उन्होंने कहा कि किताबें केवल ज्ञान का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे समाज की सोच, संस्कृति और भावनाओं को भी मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता देश की सबसे बड़ी ताकत है और हर भाषा अपने साथ संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को आगे बढ़ाती है।

राज्यपाल ने पंजाबी साहित्य की सराहना करते हुए कहा कि इस भाषा के साहित्य ने हमेशा प्रेम, भाईचारे, साहस और मानवता का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ना बहुत जरूरी है। इसके लिए ऐसे कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि भाषा और साहित्य को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते दौर में भी किताबों का महत्व कम नहीं हुआ है। आज भी पुस्तकें लोगों को ज्ञान, संवेदनशीलता और सही सोच प्रदान करती हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे साहित्य और संस्कृति के साथ जुड़ें और अपनी मातृभाषा का सम्मान करें। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य समाज का सच्चा आईना होता है और यह लोगों को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करता है।

कार्यक्रम में स्वर्गीय चंदन नेगी के परिवार को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान कई साहित्यकारों और सामाजिक हस्तियों ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित प्रोफेसर ललित मगोत्रा, साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता खालिद हुसैन, पंजाबी लेखक सभा के अध्यक्ष डॉ. बलजीत सिंह रैना, प्रसिद्ध पंजाबी उपन्यासकार सुरिंदर नीर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भाषा और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और लोगों में पढ़ने की रुचि को बढ़ावा देना रहा। लोगों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करते हैं।

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