Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में मई माह के दौरान मौसम ने लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर दी, लेकिन किसानों के लिए यह समय पूरी तरह सुखद नहीं रहा। प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई और जल स्रोतों को भी मजबूती मिली। इसके साथ ही खेती और बागवानी क्षेत्र को भी वर्षा का लाभ मिला। हालांकि अचानक आई आंधी, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर असर डाला और कई स्थानों पर फसलों को नुकसान पहुंचाया। विशेष रूप से सेब उत्पादक क्षेत्रों में मौसम की मार देखने को मिली।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मई महीने में प्रदेश में औसतन 52.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। यह सामान्य औसत वर्षा से कम रही, लेकिन कई जिलों में स्थिति बेहतर रही। ऊना जिले में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई, जहां सामान्य से काफी ज्यादा बारिश हुई। इसके अलावा बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में भी सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। इस बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली और पेयजल स्रोतों में भी सुधार देखने को मिला।
प्रदेश के कुछ जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई। चंबा, किन्नौर, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और सोलन जैसे क्षेत्रों में वर्षा का स्तर सामान्य से नीचे रहा। इसके बावजूद पहाड़ी क्षेत्रों में समय-समय पर हुई बारिश ने वातावरण को ठंडा बनाए रखा। मौसम में लगातार बदलाव के कारण लोगों को एक ही दिन में धूप, बादल और वर्षा जैसे अलग-अलग मौसम देखने को मिले।
मई के अंतिम दिनों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम ने फिर करवट ली। बारालाचा, कुंजुम और रोहतांग जैसी ऊंची चोटियों पर हल्का हिमपात दर्ज किया गया। वहीं कई निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। श्री नैना देवी जी, सराहन, बरठीं और ऊना सहित कई स्थानों पर अच्छी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इससे पहाड़ों में मौसम सुहावना बना रहा और तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
दिन के तापमान में कई स्थानों पर उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया गया। मंडी और सुंदरनगर में तापमान में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई, जबकि कल्पा और मनाली जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण आने वाले दिनों में भी मौसम परिवर्तनशील बना रह सकता है। प्रदेश के ऊंचे इलाकों में हल्के हिमपात और कई स्थानों पर वर्षा की संभावना बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मौसम का प्रभाव प्रदेश की कृषि, बागवानी और आम जनजीवन पर साफ दिखाई देगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखें और अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। मई माह का मौसम जहां एक ओर राहत लेकर आया, वहीं दूसरी ओर इसने प्राकृतिक चुनौतियों की याद भी दिलाई, जिनसे प्रदेश के किसान और बागवान लगातार जूझते रहते हैं।
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