Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में मौसम के बदले मिजाज ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। अप्रैल का प्रथम सप्ताह बीत जाने के बाद भी गर्मी के बजाय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे दिसंबर और जनवरी जैसा अहसास हो रहा है। समुद्र तल से करीब 12 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चूड़धार में बुधवार को अढ़ाई फुट ताजा बर्फबारी हुई, जिसके बाद वहां बर्फ की चादर बढ़कर चार फुट से अधिक हो गई है। लगातार खराब हो रहे मौसम और भारी बर्फबारी को देखते हुए नौहराधार पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। जोखिम भरे सफर और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल किसी भी भक्त को मंदिर की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
आमतौर पर प्रशासन द्वारा नवंबर से 15 अप्रैल तक चूड़धार यात्रा पर रोक लगाई जाती है, लेकिन इस बार अत्यधिक बर्फबारी के कारण 15 अप्रैल को शिरगुल महाराज मंदिर के कपाट खुलने पर संशय बरकरार है। प्रशासन का मानना है कि इतनी अधिक बर्फ का इतनी जल्दी पिघलना मुश्किल है, जिससे यात्रा करना बेहद जोखिमभरा हो सकता है। पुलिस ने नौहराधार में चौकसी बढ़ा दी है ताकि कोई भी श्रद्धालु चोरी-छिपे ऊंचाइयों की ओर न जा सके, क्योंकि पूर्व में कई यात्री रास्ता भटक चुके हैं जिन्हें रेस्क्यू करने में प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी।
इस बेमौसम बर्फबारी और बारिश का सबसे बुरा असर स्थानीय पशुपालकों, किसानों और बागवानों पर पड़ा है। अप्रैल माह में पड़ रही इस भीषण ठंड के कारण पशुपालकों के पास चारे और ईंधन के लिए रखी लकड़ियों का स्टॉक खत्म हो चुका है। वहीं, किसानों की नकदी फसलों—विशेषकर मटर और लहसुन—के लिए यह बारिश और ठंड काफी नुकसानदायक साबित हो रही है। नौहराधार, हरिपुरधार और गताधार जैसे मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का मिजाज पल-पल बदल रहा है, जिससे आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ने की संभावना है।
चूड़धार क्षेत्र में मौसम की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जहाँ बुधवार को हुई 2.5 फुट ताजा बर्फबारी के बाद अब बर्फ की कुल परत 4 फुट के आंकड़े को पार कर चुकी है। इस भारी बर्फबारी और जोखिम भरे रास्तों को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए हैं और पुलिस ने यात्रियों को चूड़धार जाने से पूरी तरह रोकते हुए सभी प्रमुख रास्तों पर चौकसी बढ़ा दी है। वर्तमान परिस्थितियों में 15 अप्रैल को मंदिर के कपाट खुलने पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि इतनी अधिक बर्फ के इतनी जल्दी पिघलने की संभावना बहुत कम है। इस बेमौसम ठंड और बारिश का व्यापक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर भी पड़ा है, जिससे विशेष रूप से किसानों की मटर और लहसुन जैसी नकदी फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
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