पंचायत सीमांकन और आरक्षण में देरी पर कार्रवाई, चुनाव आयोग ने जारी किए नए सख्त नियम
पंचायत सीमांकन और आरक्षण में देरी पर कार्रवाई, चुनाव आयोग ने जारी किए नए सख्त नियम

Author : Rajesh Vyas

March 30, 2026 12:44 p.m. 2207

राज्य चुनाव आयोग ने पंचायतों के विभाजन, पुनर्गठन और परिसीमन की प्रक्रिया में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई। हालांकि आयोग ने सरकार को एक अंतिम अवसर देते हुए आंशिक राहत जरूर प्रदान की है, लेकिन इसके साथ ही कई कड़े नियम और शर्तें भी लागू कर दी हैं। आयोग ने साफ कहा है कि यह राहत अंतिम मानी जाएगी और अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चुनाव आयोग ने राज्य में नवगठित 200 पंचायतों को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा जिन पंचायतों के मामले अदालत में विचाराधीन थे, उन्हें भी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है, ताकि चुनाव प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। आयोग का उद्देश्य है कि पंचायत चुनाव समय पर और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकें। इसके लिए आयोग ने सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे तय समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करें।

31 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

आयोग ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पूरे प्रदेश में पंचायतों की आरक्षण प्रक्रिया हर हाल में 31 मार्च तक पूरी की जानी चाहिए। इसके साथ ही भविष्य के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। अब उपायुक्तों को चुनाव से कम से कम तीन महीने पहले आरक्षण रोस्टर जारी करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा पंचायतों की सीमाओं में किसी भी प्रकार का बदलाव चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा, जिससे पारदर्शिता और समयबद्धता बनी रहे।

आयोग ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि पहले पंचायतों के गठन, पुनर्गठन और आरक्षण की प्रक्रिया 31 मार्च 2025 तक पूरी करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे बाद में 30 जून 2025 तक बढ़ाया गया था। इसके बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसी कारण आयोग को 17 नवंबर 2025 को आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू करनी पड़ी, जिसके तहत पंचायतों और शहरी निकायों की सीमाओं को फ्रीज कर दिया गया। आयोग ने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पंचायत चुनाव प्रक्रिया पांच साल की अवधि समाप्त होने से छह महीने पहले शुरू हो जानी चाहिए।

चुनाव ड्यूटी में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही, कर्तव्यहीनता या आदेशों की अवहेलना को बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा। यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी अपने कर्तव्यों में लापरवाही करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

आयोग के अनुसार चुनाव ड्यूटी में तैनात सभी कर्मचारी इस अवधि के दौरान आयोग के अधीन प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे और वे पूरी तरह आयोग के नियंत्रण में रहेंगे। वार्डों का परिसीमन, मतदाता सूची तैयार करना, संशोधन, चुनाव संचालन, मतगणना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जैसे सभी कार्य अत्यंत जिम्मेदारी के साथ करने होंगे। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या कदाचार की स्थिति में संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिसके आधार पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

इस तरह राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पंचायत चुनाव प्रक्रिया को समय पर और निष्पक्ष तरीके से पूरा करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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