हिमाचल में राहत और बचाव कार्य होंगे और मजबूत, पालमपुर में बनेगा SDRF परिसर
हिमाचल में राहत और बचाव कार्य होंगे और मजबूत, पालमपुर में बनेगा SDRF परिसर

Author : Rajesh Vyas

June 26, 2026 12:21 p.m. 121

हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने जिला कांगड़ा के पालमपुर उपमंडल के बगोड़ा गांव में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) का आधुनिक परिसर स्थापित करने की योजना बनाई है। यह परिसर केवल एक कार्यालय या प्रशिक्षण केंद्र नहीं होगा, बल्कि इसे राज्य में आपदा प्रबंधन और त्वरित राहत कार्यों के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद प्रदेश में आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों को पहले से अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

SDRF परिसर क्या है और क्यों है जरूरी?

SDRF यानी राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य करने वाली विशेष टीम होती है। हिमाचल प्रदेश में हर साल भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़ और सड़क हादसों जैसी घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे समय में प्रशिक्षित बचाव दल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। पालमपुर में बनने वाला यह नया परिसर SDRF जवानों को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराएगा, जिससे किसी भी आपदा के समय राहत कार्य तेजी और बेहतर तरीके से किए जा सकेंगे।

बैठक में लोगों और अधिकारियों से लिए गए सुझाव

इस परियोजना को लेकर वीरवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों ने बगोड़ा गांव में एक परामर्श बैठक आयोजित की। बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, हितधारकों और ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा करना और स्थानीय लोगों के सुझाव लेना था, ताकि परिसर का विकास क्षेत्र की जरूरतों और लोगों की अपेक्षाओं के अनुसार किया जा सके।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया परिसर

बैठक के दौरान डीएसपी एवं एचपी एसडीआरएफ के अधिकारी कैलाश शर्मा ने बताया कि प्रस्तावित परिसर में एक आधुनिक और एकीकृत SDRF कंपनी स्थापित की जाएगी। यहां विशेष प्रशिक्षण केंद्र, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था, प्रशासनिक भवन, जवानों के लिए आवासीय सुविधाएं और अन्य जरूरी सेवाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के माध्यम से SDRF की परिचालन क्षमता, प्रशिक्षण व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी। इससे किसी भी आपदा के दौरान राहत कार्यों में लगने वाला समय भी कम होगा।

पर्यावरण और स्थानीय लोगों की राय को भी मिलेगा महत्व

परियोजना को विकसित करते समय पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञ रूपा ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों को परियोजना की जानकारी देना, पर्यावरण एवं सामाजिक प्रबंधन योजना पर चर्चा करना और उनकी राय लेना था। इसके अलावा हितधारकों की भागीदारी और जेंडर एक्शन प्लान के तहत प्रस्तावित गतिविधियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय लोगों के सुझावों को परियोजना के विकास में उचित महत्व दिया जाएगा।

आपदा प्रबंधन में कैसे मिलेगी मदद?

हिमाचल प्रदेश भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है, जहां मानसून, भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में पालमपुर में बनने वाला SDRF परिसर राज्य के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। यहां प्रशिक्षित जवानों को आधुनिक तकनीकों के साथ तैयार किया जाएगा, जिससे किसी भी आपदा के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकेंगे। इससे लोगों की जान बचाने और नुकसान को कम करने में भी मदद मिलेगी।

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स्थानीय लोगों ने भी दिखाई रुचि

बैठक में डीडीएमए धर्मशाला के प्रतिनिधियों के साथ बगोड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान पंकज कपूर, उपप्रधान शिव शरण, सचिव अनीता देवी, बीडीसी सदस्य दिनेश जम्वाल और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने परियोजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव साझा किए। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि परियोजना के हर चरण में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि पालमपुर में बनने वाला SDRF परिसर हिमाचल प्रदेश की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को नई दिशा देगा। आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के कारण भविष्य में किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटना आसान होगा। इसके साथ ही यह परिसर राज्य में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और क्षमता विकास का महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेगा। आने वाले वर्षों में यह परियोजना न केवल कांगड़ा बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

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