शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी सीजेपी, सरकार के सामने रखीं शर्तें
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी सीजेपी, सरकार के सामने रखीं शर्तें

Author : Rajesh Vyas

July 24, 2026 4:42 p.m. 131

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में अपनी प्रमुख मांगों को एक बार फिर दोहराया। करीब एक घंटे तक चली इस वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, कथित पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को राहत देने तथा आंदोलन में शामिल लोगों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।बैठक के दौरान सीजेपी प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित किया है। इसलिए सरकार को केवल नए कानून बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जवाबदेही तय करते हुए ठोस प्रशासनिक कदम भी उठाने चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम में CJP, Education Minister, NEET Paper Leak, Dharmendra Pradhan, और Student Protest जैसे विषय राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक चर्चा में बने हुए हैं।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई

बैठक में शामिल प्रतिनिधियों सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों के बाद नैतिक जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। उनका कहना था कि छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाना चाहिए।

प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग

बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कथित रूप से पेपर लीक विवाद से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की मांग भी सरकार के सामने रखी। उनका कहना था कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उन्हें उचित सहायता और संवेदनशीलता के साथ राहत दी जानी चाहिए।प्रतिनिधियों ने सरकार से आग्रह किया कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग

सीजेपी ने बैठक में यह मुद्दा भी उठाया कि आंदोलन के दौरान विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाए। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध को सम्मान दिया जाना चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की परंपरा को मजबूत किया जाना चाहिए।

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सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

बैठक समाप्त होने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है। यदि मांगों पर सकारात्मक पहल होती है तो इससे छात्रों के बीच विश्वास बहाल करने और परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।

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