हिमाचल में नई श्वेत क्रांति,दूध के दाम ₹21 बढ़ने से उत्पादन हुआ दोगुना
हिमाचल में नई श्वेत क्रांति,दूध के दाम ₹21 बढ़ने से उत्पादन हुआ दोगुना

Post by : Himachal Bureau

March 16, 2026 12:01 p.m. 296

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पशुपालकों के हित में लिए गए बड़े फैसलों का असर अब धरातल पर एक 'नई श्वेत क्रांति' के रूप में दिखाई देने लगा है। प्रदेश सरकार द्वारा दूध के खरीद मूल्य में की गई ऐतिहासिक वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। पिछले दो वर्षों के दौरान दूध के खरीद मूल्य में कुल 21 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। पशुपालन, जिसे अब तक केवल आजीविका का एक साधारण साधन माना जाता था, अब प्रदेश के किसानों और युवाओं के लिए एक बेहद आकर्षक और लाभप्रद व्यवसाय बन गया है।

वर्तमान में सहकारी दूध समितियों के माध्यम से गाय का दूध लगभग 50 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए द्वार खोल दिए हैं।दूध के दामों में हुई इस भारी वृद्धि का सबसे बड़ा असर उत्पादन पर पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष के भीतर हिमाचल प्रदेश में दूध उत्पादन लगभग दोगुना हो गया है। इस लाभप्रद आय ने न केवल पुराने पशुपालकों को फिर से सक्रिय किया है, बल्कि प्रदेश के शिक्षित युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए पशुपालन की ओर आकर्षित किया है।

इसका एक उदाहरण बल्ह उपमंडल के कठियाहल निवासी विजय कुमार हैं, जिन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बावजूद पशुपालन को अपना मुख्य व्यवसाय चुना है। उनके अनुसार, पहले दूध का दाम 30 रुपये के करीब मिलता था, जो अब बढ़कर 50 से 51 रुपये हो गया है, जिससे वे प्रतिमाह 15,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। युवाओं का यह रुझान इस बात का प्रमाण है कि सही नीतियों से कृषि और पशुपालन को सम्मानजनक व्यवसाय बनाया जा सकता है।

हालांकि, उत्पादन में आई इस अचानक तेजी ने मिल्क फेडरेशन की मौजूदा व्यवस्थाओं के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। मंडी जिले के चक्कर स्थित मिल्क प्लांट में दूध की आवक इतनी अधिक बढ़ गई है कि प्लांट की भंडारण और प्रोसेसिंग क्षमता अब कम पड़ने लगी है। वर्तमान में इस प्लांट की क्षमता लगभग एक लाख लीटर प्रतिदिन है, लेकिन आवक इससे कहीं अधिक हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने चक्कर मिल्क प्लांट की चिलिंग क्षमता को बढ़ाकर दो लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है।

इसी तरह की वृद्धि अन्य प्लांटों में भी देखने को मिली है। उदाहरण के तौर पर, मंडी प्लांट में जहाँ 1 जनवरी 2025 को दूध का संग्रहण 41,628 लीटर था, वहीं 28 फरवरी 2026 तक यह बढ़कर 1,01,893 लीटर तक पहुँच गया है। दत्तनगर, कांगड़ा और नाहन जैसे अन्य केंद्रों पर भी उत्पादन में भारी उछाल दर्ज किया गया है।दूध की भारी आवक को प्रबंधित करने के लिए मिल्क फेडरेशन ने कुछ कड़े और रणनीतिक कदम भी उठाए हैं। कुल्लू और मंडी जिलों में वर्तमान में 150 नई दुग्ध सहकारी समितियों के पंजीकरण पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है ताकि पहले से पंजीकृत समितियों का दूध प्राथमिकता के आधार पर खरीदा जा सके। साथ ही, छोटे किसानों के हितों की रक्षा के लिए निजी डेरी फार्मों से दूध खरीद कम करने पर विचार किया जा रहा है।

सरकार अब दूध के अतिरिक्त उत्पादों जैसे घी, पनीर, मावा, दही, लस्सी और फ्लेवर्ड मिल्क के उत्पादन पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके अलावा, आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए मिल्क पाउडर, पंजीरी और बिस्कुट का उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री की इन दूरदर्शी नीतियों ने न केवल किसानों को आर्थिक संबल दिया है, बल्कि हिमाचल प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनाने की नींव भी रख दी है।

#हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #ताज़ा खबरें
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बजट सत्र में पेश की हिमाचल के विकास और रोजगार की योजनाएं औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में नाली में मिला युवक का शव, पुलिस ने जांच शुरू की डलहौजी में सड़क हादसा: खाई में गिरी कार, दो युवकों की मौत, चार गंभीर रूप से घायल पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर नया उपकर, अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए मदद की योजना सुजानपुर की बेटी स्वाति ठाकुर बनीं सहायक प्रोफेसर, क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल हिमाचल बजट में आत्मनिर्भरता पर जोर, किसानों और मछुआरों के लिए बड़े फैसले बिलासपुर की छात्रा शिवानी ने HPTU परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया शिमला में ट्रैफिक जाम ने बिगाड़ी रफ्तार, घंटों तक सड़कों पर फंसे लोग