Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल डेंटल हेल्थ सर्विसेज एंड वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बीएमओ घुमारवीं अनुपम शर्मा से मुलाकात की और क्षेत्रीय सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में काम करने वाले चिकित्सकों द्वारा निजी प्रैक्टिस के प्रभाव को कम करना और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करना था।
सोसायटी ने जोर देकर कहा कि सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों द्वारा निजी प्रैक्टिस पूरी तरह से प्रतिबंधित हो। प्रतिनिधिमंडल ने यह स्पष्ट किया कि इससे चिकित्सक अपने सरकारी दायित्वों पर पूरी निष्ठा और समर्पण से ध्यान देंगे, जिससे मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि यदि चिकित्सक निजी प्रैक्टिस में लगे रहते हैं तो सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है और मरीजों का भरोसा कमजोर पड़ता है।
प्रतिनिधिमंडल ने सुझाव दिया कि डेंटल ओपीडी और संबंधित स्वास्थ्य क्षेत्रों में सभी अधिकृत डेंटल प्रक्रियाओं की सूची प्रदर्शित की जाए। साथ ही रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) द्वारा निर्धारित दरें भी स्पष्ट रूप से अस्पताल में प्रमुख बोर्ड पर लगाई जाएं। यह जानकारी ऐसी जगह होनी चाहिए, जो मरीज और आम जनता आसानी से देख सके। इसके अलावा, यह जानकारी हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि उपचार और शुल्क की पूर्व जानकारी सभी को मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आग्रह किया कि किसी मरीज से नकद या किसी भी तरह का अवैध भुगतान न लिया जाए। यदि कोई शुल्क निर्धारित हो, तो वह केवल सरकारी नियमों और आरकेएस के प्रावधानों के अनुसार ही होना चाहिए। इसके साथ ही मरीज को बिल या रसीद अनिवार्य रूप से प्रदान की जाए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में डॉ. केशव, डॉ. अमित, डॉ. शिवम, डॉ. रक्षित, डॉ. बनिंदर, डॉ. नीरजा, डॉ. ऋचा, डॉ. अक्षय और डॉ. राहुल उपस्थित रहे। सोसायटी प्रतिनिधियों ने कहा कि इन व्यवस्थाओं से अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़ेगी, मरीजों का विश्वास मजबूत होगा और स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी बनेंगी।
बीएमओ घुमारवीं घुमारवीं ने सोसायटी के सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी नियमों और आरकेएस प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समय पर प्रदान करना उनका प्रमुख उद्देश्य है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। चिकित्सकों की पूरी उपस्थिति और ध्यान सरकारी सेवाओं पर रहेगा, मरीजों का भरोसा बढ़ेगा और अस्पताल में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही अस्पतालों में कामकाज और प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी अधिक संगठित और प्रभावी बनेंगी।
इस बैठक के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश गया कि हिमाचल डेंटल हेल्थ सर्विसेज एंड वेलफेयर सोसायटी मरीजों के अधिकारों और स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता को सर्वोपरि मानती है और सरकारी अस्पतालों में सुधार हेतु लगातार प्रयास कर रही है।
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