Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
विश्व टीबी दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में टीबी मुक्त अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की गई। इस अवसर पर उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने जिले में 100 दिवसीय विशेष अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी भी उपस्थित रहे और स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान की रूपरेखा को विस्तार से बताया गया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले को टीबी मुक्त बनाना है, जिसके लिए बड़े स्तर पर जागरूकता और जांच अभियान चलाया जाएगा। उपायुक्त ने बताया कि इस 100 दिवसीय अभियान के तहत जिले की लगभग 1.70 लाख हाई रिस्क आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। यह आबादी उन लोगों की है, जिन्हें टीबी होने की संभावना अधिक होती है, जैसे कि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति, बुजुर्ग, कुपोषित लोग और पहले से बीमार लोग।
उन्होंने जानकारी दी कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगी। इस दौरान न केवल संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी, बल्कि उन्हें समय पर इलाज के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, बशर्ते इसका समय पर पता लगाकर सही उपचार किया जाए।
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए केवल सरकार और स्वास्थ्य विभाग के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसमें आम जनता की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। उन्होंने जिले के लोगों से अपील की कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग करें और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सही जानकारी देकर इस मिशन को सफल बनाने में मदद करें।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार लोग टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है और दूसरों में फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि अगर किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच करवाई जाए।
इस अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें न केवल जांच करेंगी, बल्कि लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में भी जागरूक करेंगी। साथ ही स्वच्छता, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में भी जानकारी दी जाएगी, ताकि लोग इस बीमारी से बचाव कर सकें।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी ने बताया कि इस अभियान के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित टीमों का गठन किया गया है, जो आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के माध्यम से जांच करेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा टीबी के मरीजों को मुफ्त इलाज और दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती हैं, इसलिए किसी भी मरीज को घबराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने आगे बताया कि टीबी के खिलाफ यह अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि सभी लोग मिलकर इस दिशा में प्रयास करें, तो निश्चित रूप से हमीरपुर जिले को टीबी मुक्त बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर यह 100 दिवसीय अभियान हमीरपुर जिले के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाकर इस गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म करने में भी मदद करेगा। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में जिले में टीबी के मामलों में कमी आएगी और लोग एक स्वस्थ जीवन जी सकेंगे।
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