हमीरपुर में आई फ्लू का हमला, मेडिकल कॉलेज में रोज पहुँच रहे संक्रमित मरीज
हमीरपुर में आई फ्लू का हमला, मेडिकल कॉलेज में रोज पहुँच रहे संक्रमित मरीज

Post by : Himachal Bureau

March 16, 2026 3:23 p.m. 151

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला में मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही 'आई फ्लू'  ने दस्तक दे दी है, जिससे स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया है। पिछले कुछ दिनों से जिला के विभिन्न हिस्सों से संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं, जिसके चलते क्षेत्रीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर की आंखों की ओपीडी  में मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, आई ओपीडी में रोजाना तीन से चार मरीज आई फ्लू से संक्रमित पाए जा रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन द्वारा संक्रमित मरीजों का उचित उपचार करने के साथ ही उन्हें आवश्यक डॉक्टरी परामर्श देकर घर भेजा जा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संक्रमित व्यक्तियों को सार्वजनिक स्थलों पर अनावश्यक आवाजाही न करने और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है।आई फ्लू एक अत्यधिक संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैलता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह संक्रमण केवल आंखों में देखने से नहीं, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या उनके द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं को छूने से फैलता है।

यही कारण है कि मरीजों को किसी से भी हाथ न मिलाने और शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए विशेष रूप से समझाया जा रहा है। मौसम में आ रहे उतार-चढ़ाव और नमी को इस वायरस के फैलने का मुख्य कारण माना जा रहा है। अस्पताल आने वाले मरीजों को यह भी हिदायत दी जा रही है कि वे अपनी आंखों को बार-बार न छुएं, क्योंकि हाथों के माध्यम से यह संक्रमण अन्य स्वस्थ व्यक्तियों तक बहुत आसानी से पहुँच सकता है।

इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है ताकि समय पर उपचार शुरू किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, आंखों का अत्यधिक लाल या गुलाबी होना, तेज खुजली, जलन, लगातार पानी आना और पलकों में चिपचिपा स्राव होना आई फ्लू के प्राथमिक संकेत हैं। यह संक्रमण वायरल या बैक्टीरियल दोनों प्रकार का हो सकता है, जिसके कारण अक्सर सुबह उठने पर आंखें आपस में चिपक जाती हैं।

इसके अलावा आंखों में किरकिरापन महसूस होना और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता  बढ़ जाना भी इसके लक्षणों में शामिल है। बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने हाथों को समय-समय पर साबुन से धोते रहें, आंखों को रगड़ने से बचें और अपना तौलिया, रूमाल या चश्मा किसी अन्य के साथ साझा न करें। यदि लक्षण गंभीर महसूस हों, तो स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है।

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