Author : Gopal Dutt Sharma
सिरमौर जिले के राजगढ़ क्षेत्र के देवठी मझगांव में चल रहे करियाला और सिरमौरी नाटी प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल्यांकन संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली की एक विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पद्मश्री विद्यानंद सरैक के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है और पिछले एक वर्ष से लगातार संचालित हो रहा है।
यह कार्यक्रम कला दीक्षा योजना के तहत आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश की पारंपरिक लोक कलाओं और सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। प्रशिक्षण के दौरान युवा कलाकारों ने करियाला, जिसे स्वांग के नाम से भी जाना जाता है, और पारंपरिक सिरमौरी नाटी की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों के प्रदर्शन ने सभी उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
मूल्यांकन के दौरान विशेषज्ञ टीम ने प्रशिक्षुओं की कला, मेहनत और लोक संस्कृति के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। टीम ने कहा कि युवा कलाकारों ने प्रशिक्षण के दौरान काफी अच्छी प्रगति दिखाई है और पारंपरिक कला रूपों को सीखने में गहरी रुचि दिखाई है।
विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की गुणवत्ता की भी प्रशंसा की। उनका मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम लोक संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहती है और पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
यह पहल हिमाचल प्रदेश की विलुप्त होती लोक कलाओं को बचाने और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्थानीय लोगों ने भी इस प्रयास की सराहना की और उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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