Author : Rajesh Vyas
हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में डॉ. नरेंद्र पाठक ने अपने अनुभव और जुनून को स्वरोजगार में बदलकर एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के प्रसिद्ध सिंबिडियम ऑर्किड को हिमाचल की ठंडी जलवायु में सफलतापूर्वक उगाया। उनका यह प्रयास यह दिखाता है कि सही तकनीक और मेहनत से किसी भी क्षेत्र में सफलता पाई जा सकती है।
करीब 1000 वर्गफीट क्षेत्र में स्थापित अत्याधुनिक पॉलीहाउस में 50 से अधिक ओर्किड वैरायटी उगाई जा रही हैं। इस पॉलीहाउस में पौधों की देखभाल आधुनिक तकनीक और फ्लोरीकल्चर प्रबंधन के जरिए की जाती है। हर पौधे की गुणवत्ता और बाजार में उसकी कीमत सुनिश्चित की जाती है।
सरकारी सहयोग ने इस परियोजना को और मजबूत बनाया। उद्यान विभाग की ‘पुष्प क्रांति योजना’ के तहत डॉ. पाठक को 18.5 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। एक ऑर्किड की कीमत ₹50 से ₹500 तक हो सकती है, जिससे 5–6 वर्षों में यह व्यवसाय स्थिर और मजबूत आय का स्रोत बन सकता है।
डॉ. पाठक का कहना है कि यह व्यवसाय न केवल आर्थिक लाभ देता है, बल्कि युवाओं के लिए Flower Farming और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा करता है। उनके इस प्रयास से यह साबित होता है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की मदद से युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
पालमपुर में विकसित ऑर्किड न केवल स्थानीय बाजार में बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजे जा सकते हैं। इस तरह यह परियोजना क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती है और युवाओं को रोजगार के नए अवसर देती है। डॉ. नरेंद्र पाठक की पहल हिमाचल प्रदेश में फ्लोरीकल्चर और स्वरोजगार के क्षेत्र में नई दिशा देने वाली साबित हो रही है।
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