60 पार जज्बा, रिटायर इंजीनियर अब बन रहे वकील पेश की मिसाल
60 पार जज्बा, रिटायर इंजीनियर अब बन रहे वकील पेश की मिसाल

Post by : Himachal Bureau

March 17, 2026 12:32 p.m. 137

कहते हैं कि यदि मन में सपने देखने और उन्हें पूरा करने का जज्बा हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। इसका जीवंत और प्रेरणादायक उदाहरण पेश कर रहे हैं ऊना के निवासी संजीव अग्निहोत्री। लोक निर्माण विभाग  से अधिशासी अभियंता के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद, 60 की उम्र पार कर चुके संजीव का शिक्षा के प्रति जुनून आज भी बरकरार है।

संजीव अग्निहोत्री ने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद घर बैठने के बजाय हिमकैप्स लॉ कॉलेज, बढ़ेडा में एलएलबी  में दाखिला लेकर जीवन की एक नई शुरुआत की है। इस उम्र में युवाओं के साथ नियमित कक्षाओं में बैठना और परीक्षाओं की तैयारी करना उनके अटूट संकल्प को दर्शाता है। उनका मानना है कि शिक्षा ग्रहण करने की कोई निश्चित आयु नहीं होती और कानून का ज्ञान हर नागरिक के लिए अनिवार्य है। वर्तमान में वह अपने पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं दे चुके हैं और दूसरे सेमेस्टर की तैयारी में जुटे हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और समाजसेवा

संजीव अग्निहोत्री का परिवार भी उच्च शिक्षित है। उनकी बेटी डॉक्टर के रूप में समाज की सेवा कर रही है, जबकि बेटा आईआईटी से इंजीनियरिंग करने के बाद एक प्रतिष्ठित निजी कंपनी में कार्यरत है। बच्चों की सफलता के बाद अब संजीव स्वयं अपने शैक्षणिक सपनों को पंख दे रहे हैं।शिक्षा के साथ-साथ संजीव समाजसेवा में भी सदैव अग्रणी रहते हैं। वह 'हिमोत्कर्ष' और 'रोटरी इंटरनेशनल' जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के माध्यम से पीड़ित मानवता की सेवा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

संजीव अग्निहोत्री की यह पहल उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है, जो बढ़ती उम्र का हवाला देकर अपने सपनों का त्याग कर देते हैं। उनका संदेश स्पष्ट है: "यदि मन में सीखने की सच्ची लगन हो, तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर एक नई और शानदार शुरुआत की जा सकती है।"

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