Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के कसौली क्षेत्र में पिछले दो दिनों से भीषण जंगल की आग ने भारी तबाही मचा रखी है। आग इतनी तेजी से फैली कि कई घने जंगल इसकी चपेट में आ गए। हालात को गंभीर होते देख भारतीय वायुसेना को भी राहत और बचाव कार्य के लिए मैदान में उतरना पड़ा। लगातार धधक रही आग के कारण आसपास के क्षेत्रों में धुआं फैल गया है और लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार आग सबसे पहले कसौली वायुसेना स्टेशन के आसपास के जंगलों में भड़की थी। देखते ही देखते आग ने आसपास के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन, वन विभाग और दमकल विभाग की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन तेज हवाओं और सूखे जंगलों के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
भारतीय वायुसेना ने बताया कि शाम से ही जंगल की आग को बुझाने के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया गया था। रात के अंधेरे में भी राहत कार्य लगातार जारी रखा गया। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने चंडीगढ़ स्थित सुखना झील से पानी भरकर कई बार उड़ान भरी और आग प्रभावित इलाकों में पानी गिराया। इस दौरान हजारों लीटर पानी जंगलों में छोड़ा गया ताकि आग पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाया जा सके।
वायुसेना द्वारा चलाए गए अग्निशमन अभियान में विशेष बम्बी बकेट तकनीक का उपयोग किया गया। जिन स्थानों तक जमीनी टीमें नहीं पहुंच पा रही थीं, वहां हेलीकॉप्टरों की मदद से पानी गिराया गया। अधिकारियों के अनुसार अब तक कई उड़ानों के जरिए आग प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत कार्य जारी है।
आग कसौली से फैलते हुए कोटी, सनावर, गड़खल, मनोण और आसपास के कई जंगलों तक पहुंच चुकी है। इस भीषण वनाग्नि के कारण बड़ी मात्रा में पेड़-पौधे जलकर राख हो गए हैं। जंगलों में रहने वाले कई वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हुए हैं। स्थानीय लोग भी आग की भयावहता देखकर चिंतित हैं।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लगातार बढ़ती गर्मी और सूखे मौसम के कारण जंगलों में आग तेजी से फैल रही है। प्रशासन ने लोगों से जंगलों के आसपास सावधानी बरतने और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने की अपील की है। इस दौरान वायुसेना हेलीकॉप्टर राहत कार्य में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग और वन कर्मियों के साथ मिलकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि कई इलाकों में अब भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।
कसौली और आसपास के क्षेत्रों में फैली इस हिमाचल आग ने पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है। वहीं प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
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