Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
जिला मंडी में किसानों को बाजार की सही जानकारी देने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जायका (JICA) कृषि परियोजना के अंतर्गत ब्लॉक परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी द्वारा एसएचईपी पद्धति के तहत एक दिवसीय बाजार सर्वेक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार की वास्तविक स्थिति, फसलों की मांग और कीमतों के उतार-चढ़ाव के बारे में जानकारी देना था, ताकि वे अपनी खेती की बेहतर योजना बना सकें।
यह बाजार सर्वेक्षण कार्यक्रम मंगलवार को डडौर और धनोटू स्थित एपीएमसी मार्केट यार्ड में आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को सीधे बाजार में जाकर व्यापारियों से बातचीत करने और बाजार व्यवस्था को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम का संचालन एसएमएस डॉ. खूब राम, खंड परियोजना प्रबंधक डॉ. राजेश कुमार और कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) हंस राज के मार्गदर्शन में किया गया। इन अधिकारियों ने किसानों को बताया कि बाजार की सही जानकारी होने से खेती को एक बेहतर व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।
इस बाजार सर्वेक्षण में कुल 40 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। ये किसान विभिन्न उप-परियोजनाओं से जुड़े हुए थे, जिनमें एफआईएस ठंडी बावड़ी, एफआईएस पाज्जा नाला, एफआईएस केहड़ और एसटीडब्ल्यू लोहारा शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान किसानों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर बाजार में भेजा गया, जहां उन्होंने थोक और खुदरा व्यापारियों से सीधे बातचीत की और कई महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र कीं।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने बाजार में मौजूद थोक और खुदरा व्यापारियों से संवाद किया। उन्होंने अलग-अलग फसलों की मांग, बाजार में उनकी उपलब्धता, कीमतों में मौसमी उतार-चढ़ाव और विभिन्न समय पर मिलने वाली अधिकतम और न्यूनतम दरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा किसानों ने संभावित खरीदारों के संपर्क विवरण भी एकत्र किए, ताकि भविष्य में वे सीधे उनसे संपर्क कर अपनी उपज बेच सकें।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि एसएचईपी पद्धति के माध्यम से किसान बाजार की वास्तविक मांग और मूल्य प्रवृत्तियों का अध्ययन कर सकते हैं। जब किसान यह जान लेते हैं कि बाजार में किस फसल की अधिक मांग है और किस समय उसकी कीमत बेहतर मिलती है, तो वे उसी अनुसार अपनी खेती की योजना बना सकते हैं। इससे उत्पादन भी सही दिशा में होता है और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है।
इस प्रकार के बाजार सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें बाजार से भी जोड़ना है। अधिकारियों ने बताया कि जब किसान बाजार की जरूरतों को समझकर फसल उत्पादन करेंगे, तो उन्हें अपनी मेहनत का सही लाभ मिलेगा और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। इस तरह के कार्यक्रम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि आने वाले समय में भी इस तरह के प्रशिक्षण और सर्वेक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसानों को बाजार की जानकारी मिल सके। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इन कार्यक्रमों में सक्रिय भाग लें और आधुनिक खेती तथा बाजार आधारित उत्पादन प्रणाली को अपनाएं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र का समग्र विकास भी संभव होगा।
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