किन्नौर में आसमानी बिजली का कहर, 200 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत
किन्नौर में आसमानी बिजली का कहर, 200 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत

Post by : Himachal Bureau

Aug. 13, 2026 4:36 p.m. 119

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर से प्राकृतिक आपदा की एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। रूपी कंडे के दुर्गम चरागाह क्षेत्र में बुधवार देर रात अचानक आसमानी बिजली गिरने से 200 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत होने की सूचना है। इस घटना से पशुपालकों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय आसपास मौजूद सभी पशुपालक सुरक्षित रहे।

देर रात बिजली गिरने से मची तबाही

स्थानीय जानकारी के अनुसार घटना बुधवार रात करीब 11 बजे की है। उस समय रूपी कंडे क्षेत्र के चरागाह में बड़ी संख्या में भेड़-बकरियां एक जगह बैठी हुई थीं। इसी दौरान अचानक मौसम बदला और तेज गर्जना के साथ आसमान से बिजली गिरी। बिजली की चपेट में आने से बड़ी संख्या में पशुओं की मौके पर ही मौत हो गई। अंधेरा और दुर्गम इलाका होने के कारण प्रारंभिक समय में नुकसान का पूरा आकलन नहीं हो सका। सुबह होने के बाद ही मृत पशुओं की संख्या और बढ़ने का अनुमान लगाया गया। यह घटना Lightning Strike की गंभीरता को भी सामने लाती है, क्योंकि कुछ ही क्षणों में बड़ी संख्या में पशुओं की जान चली गई।

शैड में होने के कारण बची पशुपालकों की जान

घटना के समय पशुपालक अपने पशुओं के पास ही थे, लेकिन कुछ दूरी पर बने एक शैड के भीतर सो रहे थे। बिजली सीधे पशुओं के झुंड वाले स्थान पर गिरी, जिससे पशुपालकों को भी अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद खतरा पैदा हो गया था। हालांकि, शैड में होने के कारण सभी लोग सुरक्षित बच गए। इस हादसे में किसी इंसान के घायल होने या जान जाने की सूचना नहीं है। पशुपालकों के लिए यह राहत की सबसे बड़ी बात रही।

अंधेरे में 150 पशुओं की ही हो सकी गिनती

रूपी पंचायत के प्रधान मगला खोजान के अनुसार घटना के बाद पशुपालक गुमान सिंह ने अंधेरे में नुकसान का जायजा लेने की कोशिश की। लेकिन रात होने के कारण वह करीब 150 मृत भेड़-बकरियों की ही गिनती कर सके। सुबह रोशनी होने के बाद मृत पशुओं की संख्या 200 से अधिक होने का अनुमान लगाया गया। अंतिम संख्या प्रशासनिक टीम की विस्तृत जांच और मौके के निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

परिवार तक खबर पहुंचाना भी बना चुनौती

रूपी कंडे क्षेत्र में मोबाइल संचार की सुविधा बेहद कमजोर बताई जाती है। हादसे के बाद पशुपालक को अपने परिवार और प्रशासन तक सूचना पहुंचाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर नेटवर्क वाले स्थान तक जाना पड़ा। दुर्गम क्षेत्रों में इस तरह की संचार समस्या आपदा की स्थिति में काफी गंभीर साबित हो सकती है। Kinnaur Weather जैसे कठिन मौसम के दौरान तुरंत सूचना मिलने से राहत और प्रशासनिक कार्रवाई तेज की जा सकती है।

प्रशासन ने भेजी संयुक्त टीम

घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। भावानगर की उपमंडलाधिकारी नेहा नेगी ने बताया कि वीरवार सुबह एक संयुक्त प्रशासनिक टीम को नुकसान का जायजा लेने के लिए घटनास्थल की ओर रवाना किया गया। टीम मौके पर पहुंचकर मृत पशुओं की संख्या, प्रभावित परिवारों और कुल नुकसान का आकलन करेगी। हालांकि घटनास्थल पर मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण टीम से तत्काल संपर्क नहीं हो पा रहा है।

अंतिम आंकड़े के बाद मिलेगा मुआवजा

प्रशासन के अनुसार टीम के वापस लौटने के बाद ही मृत भेड़-बकरियों की वास्तविक और अंतिम संख्या सामने आएगी। इसके बाद सरकारी नियमों के अनुसार प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। Animal Loss Compensation के तहत पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध करवाई जा सकती है। पशुपालकों के लिए यह आर्थिक नुकसान काफी बड़ा माना जा रहा है, क्योंकि भेड़-बकरियां उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन हैं।

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प्राकृतिक आपदा ने बढ़ाई चिंता

रूपी कंडे जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालकों को मौसम पर निर्भर रहकर अपनी रोजमर्रा की आजीविका चलानी पड़ती है। बारिश, बिजली गिरने और अचानक मौसम खराब होने जैसी घटनाएं उनके लिए बड़ा जोखिम बन सकती हैं। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और समय पर चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने की मांग भी उठ सकती है। Himachal Pradesh Disaster जैसी परिस्थितियों में दूरदराज के क्षेत्रों तक सूचना और राहत पहुंचाना प्रशासन के लिए भी चुनौतीपूर्ण रहता है। फिलहाल प्रशासनिक टीम के निरीक्षण के बाद ही इस घटना से हुए वास्तविक नुकसान का पता चल पाएगा। पशुपालक प्रभावित परिवारों को जल्द आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

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