नैना देवी मंदिर के जंगलों में भीषण आग, 350 श्रद्धालु सुरक्षित निकाले गए
नैना देवी मंदिर के जंगलों में भीषण आग, 350 श्रद्धालु सुरक्षित निकाले गए

Post by : Himachal Bureau

June 10, 2026 1:21 p.m. 534

हिमाचल प्रदेश में गर्मियों के मौसम के साथ जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रदेश के कई जिलों में वन क्षेत्रों में आग से पर्यावरण, वन संपदा और वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इसी बीच कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां क्षेत्र से एक चिंताजनक घटना सामने आई, जहां प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर के आसपास फैले घने जंगल में अचानक भीषण आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही समय में पूरा क्षेत्र धुएं और आग की लपटों से घिर गया, जिससे मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई।

बताया जा रहा है कि मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजन चल रहा था। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना, भंडारे और रात्रि जागरण में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान पहाड़ी के आसपास स्थित जंगल में आग लग गई। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और देखते ही देखते मंदिर के आसपास का बड़ा इलाका इसकी चपेट में आ गया। आग की बढ़ती लपटों को देखकर मंदिर में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया। सबसे पहले मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग को सुरक्षित बनाने का प्रयास किया गया, क्योंकि आग सड़क के दोनों ओर फैल चुकी थी। बचाव दलों ने लगातार प्रयास करते हुए आग को नियंत्रित करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षित निकासी की योजना तैयार की।

राहत अभियान के दौरान बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी गई। प्रशासन की निगरानी में वाहनों की सहायता से श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। कई घंटों तक चले इस अभियान के बाद मंदिर परिसर में मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। अधिकारियों के अनुसार राहत कार्य के दौरान किसी भी व्यक्ति के घायल होने या किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली।

इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में बढ़ रही जंगल की आग की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आग की चपेट में आने से बड़ी संख्या में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कई चीड़ के पेड़ पूरी तरह जल गए, जबकि आसपास के वन क्षेत्र को भी काफी क्षति पहुंची है। विशेषज्ञों का कहना है कि सूखी पत्तियां, गर्म मौसम और तेज हवाएं जंगलों में आग फैलने के प्रमुख कारण बन रही हैं।

इस दौरान प्रशासन ने नैना देवी मंदिर में मौजूद सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी बनाए रखी। बचाव दलों की तत्परता और स्थानीय लोगों के सहयोग से एक संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई। अधिकारियों ने बताया कि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान की सराहना की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन विभाग ने समन्वय के साथ काम करते हुए सैकड़ों लोगों की जान सुरक्षित बचाई। वहीं वन विभाग भी आग से हुए नुकसान का आकलन करने में जुट गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जंगलों में आग से संबंधित किसी भी घटना की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें।

साथ ही जंगलों में जलती वस्तुएं, सिगरेट या अन्य ज्वलनशील सामग्री न फेंकें। बढ़ती आग की घटनाओं को देखते हुए लोगों की सतर्कता बेहद जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक जागरूकता और समय पर सूचना ही ऐसी घटनाओं को रोकने में सबसे अधिक मददगार साबित हो सकती है। इस पूरी घटना के दौरान हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता और बचाव दलों की मेहनत के चलते सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान सुरक्षित बच गई और एक बड़ा हादसा टल गया।

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