Author : Ritesh Kumar Sood
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़े टकराव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशभर में प्राकृतिक गैस की राशनिंग लागू करने का फैसला लिया है, ताकि सीमित संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जा सके और आवश्यक क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता बनी रहे।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस संबंध में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आदेश जारी किया है। मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 9 मार्च 2026 से पूरे देश में गैस राशनिंग व्यवस्था लागू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने हालात के कारण गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है, इसलिए समय रहते यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।
सरकार के अनुसार मिडिल ईस्ट क्षेत्र से दुनिया के कई देशों को एलएनजी की आपूर्ति होती है और भारत भी इस आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है। मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि देश में उपलब्ध गैस संसाधनों का सही और न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में अचानक गैस की कमी की स्थिति न बने।
इस फैसले के साथ ही सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। पहले उपभोक्ता एक सिलेंडर की डिलीवरी मिलने के 21 दिन बाद अगला सिलेंडर बुक कर सकते थे, लेकिन अब इस अवधि को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। यानी उपभोक्ताओं को अगले सिलेंडर की बुकिंग के लिए चार दिन अधिक इंतजार करना होगा। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से गैस की उपलब्धता को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीमित गैस संसाधनों का सही प्रबंधन करना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर आम लोगों की रसोई, घरेलू जरूरतों और सार्वजनिक परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं पर कम से कम पड़े। सरकार चाहती है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति की व्यवस्था संतुलित बनी रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर होने वाले भू-राजनीतिक तनाव का असर अक्सर ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर देश पर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में सरकार की ओर से समय रहते उठाए गए कदम भविष्य में संभावित संकट को कम करने में मदद कर सकते हैं।
सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे गैस का उपयोग सोच-समझकर करें और अनावश्यक खपत से बचें। यदि सभी लोग जिम्मेदारी के साथ गैस का उपयोग करेंगे तो मौजूदा परिस्थितियों में भी देश में गैस की उपलब्धता को संतुलित बनाए रखना आसान होगा। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
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