Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने की संभावना है। राज्य में अगले चार-पांच दिनों के दौरान कई हिस्सों में भारी बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को बिलासपुर, कांगड़ा और सिरमौर जिलों में बहुत भारी बारिश को लेकर Orange Alert जारी किया है। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 14, 17 और 18 अगस्त को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। शुक्रवार को हमीरपुर, चंबा, मंडी, शिमला और सोलन में भी भारी बारिश का Yellow Alert जारी किया गया है। लोगों को खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार भारी बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में 136 सड़कें अभी भी यातायात के लिए बंद हैं। मंडी में सबसे अधिक 48 सड़कें बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 37 और शिमला में 26 सड़कें प्रभावित हैं। चंबा में सात, सिरमौर में छह, कांगड़ा में पांच, ऊना में चार, लाहौल-स्पीति में दो और किन्नौर में एक सड़क बंद है। बारिश के कारण कई क्षेत्रों में लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से बंद सड़कों को खोलने का काम लगातार किया जा रहा है।
पिछले 24 घंटे में धर्मशाला में सबसे अधिक 52 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। रोहड़ू में 22 मिलीमीटर, खदराला में 17 मिलीमीटर और कसौली में 12 मिलीमीटर बारिश हुई। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से दो से पांच डिग्री अधिक दर्ज किया गया। कुकुमसेरी 10.3 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ सबसे ठंडा रहा, जबकि ऊना में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मानसून के दौरान भारी बारिश ने राज्य के बुनियादी ढांचे को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। अब तक 242 पेयजल योजनाएं और नौ बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं। राज्य में बारिश से संबंधित घटनाओं के कारण अब तक 77 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें भूस्खलन से 14 और अचानक आई बाढ़ से एक व्यक्ति की मौत शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, मानसून आने के बाद से राज्य को करीब 955 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। आने वाले दिनों में भारी बारिश जारी रहने पर नुकसान बढ़ने की आशंका है।
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किन्नौर जिले के रूपी कांडे क्षेत्र में बुधवार देर रात आकाशीय बिजली गिरने से 200 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो गई। बताया गया कि पशुओं का झुंड खुले चरागाह में था। इसी दौरान अचानक बिजली गिर गई। चरवाहे उस समय कुछ दूरी पर सो रहे थे, इसलिए उनकी जान बच गई। मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण एक चरवाहे को घटना की सूचना देने के लिए कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ा। प्रशासन ने घटना के बाद नुकसान का आकलन करने के लिए टीम मौके पर भेजी है। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रभावित पशुपालकों को नियमानुसार सहायता और मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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