Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र से निकलकर भारतीय कबड्डी में पहचान बनाने वाली रितु नेगी की कहानी मेहनत, अनुशासन और लगातार आगे बढ़ने की मिसाल है। गांव और पहाड़ी क्षेत्र से शुरू हुआ उनका सफर भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तानी तक पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने कई अहम उपलब्धियां हासिल कीं। रितु नेगी ने 2023 में हांगझोऊ में आयोजित 19वें एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तानी की और टीम ने स्वर्ण पदक जीता। उनके अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार 2023 से सम्मानित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9 जनवरी 2024 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
रितु नेगी का जन्म 30 मई 1992 को सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में हुआ। बचपन से ही उन्हें खेलों में रुचि थी। उनके पिता भी कबड्डी से जुड़े रहे, जिससे घर के माहौल में ही उन्हें इस खेल को समझने और अपनाने का अवसर मिला। साल 2006 में कक्षा 10 के दौरान रितु बिलासपुर स्थित स्टेट स्पोर्ट्स हॉस्टल पहुंचीं। यहीं से उनके खेल जीवन को व्यवस्थित प्रशिक्षण और नई दिशा मिली। शिलाई से बिलासपुर तक का सफर आसान नहीं था। रिपोर्टों के अनुसार, उस दौर में उन्हें हॉस्टल पहुंचने के लिए रास्ते में तीन बसें बदलनी पड़ती थीं। स्पोर्ट्स हॉस्टल में नियमित अभ्यास, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के अनुभव ने उनके खेल को मजबूत किया। धीरे-धीरे उन्होंने राज्य स्तर से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई।
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रितु नेगी ने भारतीय महिला कबड्डी टीम में अपनी जगह मजबूत करने के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। 2019 के साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने भारतीय टीम के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2023 में हांगझोऊ एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की कमान रितु नेगी के हाथों में थी। भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उपलब्धि उनके करियर के महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल रही और शिलाई की इस खिलाड़ी का नाम अंतरराष्ट्रीय कबड्डी मंच पर और मजबूत हुआ।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रदर्शन और उपलब्धियों के लिए रितु नेगी को अर्जुन पुरस्कार 2023 के लिए चुना गया। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उन्हें कबड्डी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए यह सम्मान दिया गया। 9 जनवरी 2024 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रितु नेगी को अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया। यह सम्मान उनके लंबे खेल करियर और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना।
रितु नेगी का अंतरराष्ट्रीय सफर 2023 के एशियन गेम्स के बाद भी जारी रहा। 2025 में ढाका में आयोजित महिला कबड्डी वर्ल्ड कप में उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी की। फाइनल मुकाबले में भारत ने चीनी ताइपे को 35-28 से हराकर खिताब अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश की पांच खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा थीं। इनमें रितु नेगी कप्तान और पुष्पा राणा उप-कप्तान के रूप में शामिल थीं। इस जीत ने रितु नेगी के अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ी और भारतीय महिला कबड्डी में हिमाचल की खिलाड़ियों की मौजूदगी को भी सामने रखा।
रितु नेगी का भारतीय कबड्डी टीम से जुड़ाव 2026 में भी जारी रहा। 2026 एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय महिला कबड्डी टीम में रितु नेगी को भी जगह मिली। इस बार टीम की कप्तानी हिमाचल प्रदेश की ही पुष्पा राणा को सौंपी गई। इस तरह शिलाई और हिमाचल की महिला खिलाड़ियों की भारतीय कबड्डी में मौजूदगी का सिलसिला आगे बढ़ता दिखाई देता है। रितु नेगी ने जहां भारतीय टीम की कप्तानी कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई, वहीं अब पुष्पा राणा टीम की कमान संभाल रही हैं।
रितु नेगी की कहानी सिर्फ पदकों और पुरस्कारों तक सीमित नहीं है। यह उस सफर को दिखाती है जिसमें सिरमौर के पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर एक खिलाड़ी ने प्रशिक्षण, मेहनत और लगातार प्रतियोगिताओं के जरिए भारतीय महिला कबड्डी टीम में अपनी जगह बनाई। शिलाई से बिलासपुर के स्पोर्ट्स हॉस्टल तक का सफर, फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं और उसके बाद अंतरराष्ट्रीय मैदानों तक पहुंचना रितु नेगी के लंबे खेल करियर का हिस्सा रहा है। एशियन गेम्स का स्वर्ण, अर्जुन पुरस्कार और महिला कबड्डी वर्ल्ड कप की जीत उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं।
रितु नेगी का सफर हिमाचल के उन युवाओं के लिए एक उदाहरण है, जो सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी क्षेत्रों से निकलकर खेल की दुनिया में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। उनकी कहानी बताती है कि किसी बड़े खेल मंच तक पहुंचने की शुरुआत अक्सर स्थानीय मैदान और छोटे से गांव से ही होती है।
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