हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: वन क्षेत्रों की सड़कों पर अगले आदेश तक निर्माण और टारिंग पर रोक
हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: वन क्षेत्रों की सड़कों पर अगले आदेश तक निर्माण और टारिंग पर रोक

Post by : Himachal Bureau

Oct. 14, 2026 11 a.m. 127

शिमला, 14 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वन क्षेत्रों में सड़क निर्माण और टारिंग को लेकर अपने पहले के आदेश को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक वन क्षेत्रों की सड़कों पर किसी भी तरह का निर्माण या टारिंग नहीं की जाएगी। पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में सड़क निर्माण से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह निर्देश दिया। मामले में वन संरक्षण नियमों के पालन और पहले से बनाई गई सड़कों की वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने 17 अगस्त के आदेश को दोहराया

मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान 17 अगस्त, 2026 को जारी अपने पिछले आदेश को दोहराया। इसके तहत अगले आदेश तक वन क्षेत्रों में सड़कों पर निर्माण कार्य और टारिंग नहीं की जा सकेगी।अदालत का यह निर्देश ऐसे समय में आया है, जब राज्य के वन क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए जरूरी अनुमतियों और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आदेश का उद्देश्य वन क्षेत्रों में नियमों के अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर विचार के दौरान निर्माण गतिविधियों पर रोक बनाए रखना है।

सेराज और नाचन में 55 सड़कों के निर्माण का मामला

सुनवाई के दौरान न्यायालय मित्र (एमिकस क्यूरी) ने अदालत के सामने एक चार्ट पेश किया। इसमें बताया गया कि मंडी जिले के सेराज विधानसभा क्षेत्र और नाचन वन मंडल में हिमाचल प्रदेश वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के उल्लंघन के आरोपों के बीच 55 सड़कों का निर्माण किया गया है। पेश किए गए विवरण के अनुसार, कई मामलों में संबंधित उपयोगकर्ता एजेंसियों की ओर से जरूरी प्रस्ताव अभी प्रस्तुत किए जाने बाकी हैं, जबकि सड़कें पहले ही बनाई जा चुकी हैं। इससे वन भूमि के इस्तेमाल की अनुमति लेने की प्रक्रिया और निर्माण कार्य के क्रम को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, इन सड़कों से संबंधित प्रत्येक मामले की स्थिति और अनुमति के दस्तावेजों का अंतिम निष्कर्ष सुनवाई तथा संबंधित रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।

वन अधिकार अधिनियम के तहत अनुमति पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत दी गई कुछ अनुमतियों पर भी सवाल उठाए गए। अदालत के समक्ष यह मुद्दा रखा गया कि क्या संबंधित प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन किया गया और क्या लिए गए फैसले वनवासियों तथा जंगलों के हितों के अनुरूप थे। वन क्षेत्रों में किसी भी विकास कार्य के लिए लागू कानूनी प्रावधानों का पालन करना जरूरी है। ऐसे में सड़क निर्माण के लिए वन भूमि के इस्तेमाल, संबंधित अनुमतियों और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन इस मामले के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

Read Also: बचपन की यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे ‘कॉमिक्स वाले चेतन भाई’, बैजनाथ-पपरोला में शोक

सेराज में 16 हेलीपैड और वन्यजीवों पर प्रभाव का मुद्दा

सुनवाई के दौरान सेराज क्षेत्र में 16 हेलीपैड होने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई। वन क्षेत्रों में सड़क और अन्य निर्माण गतिविधियों के कारण वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि सड़क निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों की कटाई हुई है। ऐसे में क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वन क्षेत्रों में विकास कार्यों से स्थानीय लोगों को आवागमन की सुविधा मिल सकती है, लेकिन ऐसे कार्यों में पर्यावरण संरक्षण और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन भी महत्वपूर्ण है। इस मामले में इन्हीं पहलुओं पर न्यायालय के समक्ष विचार किया जा रहा है।

2 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर, 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक हाईकोर्ट का निर्देश प्रभावी रहेगा कि अगले आदेश तक वन क्षेत्रों की सड़कों पर निर्माण और टारिंग नहीं की जाएगी। आगामी सुनवाई में संबंधित रिकॉर्ड और वन क्षेत्रों में सड़क निर्माण से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार किया जा सकता है। इस मामले का परिणाम हिमाचल प्रदेश में वन भूमि के इस्तेमाल, सड़क निर्माण की अनुमति प्रक्रिया और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

#शिमला #हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #ताज़ा खबरें
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
हिमाचल की नन्ही कलाकार आशवी को राष्ट्रीय सम्मान, प्रदेश का नाम रोशन सिरमौर में 24 वर्षीय प्रधान का फैसला, शादी में फिजूलखर्ची पर 51 हजार जुर्माना मोनिका ठाकुर ने CSIR NET JRF में हासिल की ऑल इंडिया 65वीं रैंक, सराज का नाम किया रोशन 1 सितंबर 1972 को कांगड़ा से अलग बना था हमीरपुर जिला, जानें इतिहास बिजली महादेव मंदिर में चला सफाई अभियान, 2 क्विंटल प्लास्टिक कचरा हटाया हिमाचल में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज नेपाल में फंसे हिमाचलियों की जानकारी दें, प्रशासन ने जारी किए निर्देश मणिमहेश यात्रा के पहले दिन 253 श्रद्धालु हुए रवाना, 20 सितंबर तक चलेगी यात्रा