हिमाचल में किसानों के लिए अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े की कृषि सलाह जारी
हिमाचल में किसानों के लिए अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े की कृषि सलाह जारी

Author : Rajesh Vyas

Oct. 16, 2026 6:09 p.m. 108

पालमपुर, हिमाचल प्रदेश। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने अक्टूबर 2026 के दूसरे पखवाड़े के लिए किसानों और पशुपालकों को कृषि संबंधी सलाह जारी की है। विश्वविद्यालय के कृषि एवं पशुपालन वैज्ञानिकों ने मौसम और खेती के मौजूदा चरण को ध्यान में रखते हुए गेहूं, दलहनी फसलों, तिलहनी फसलों, सब्जियों, फसल संरक्षण और पशुधन प्रबंधन से जुड़े जरूरी सुझाव दिए हैं। इस सलाह का उद्देश्य किसानों को सही समय पर बुवाई, बीज उपचार, खाद प्रबंधन, रोगों की रोकथाम और पशुओं की देखभाल के बारे में जानकारी देना है। Himachal Agriculture Advisory के तहत दी गई इन सिफारिशों को अपनाकर किसान अपनी खेती की योजना बेहतर तरीके से बना सकते हैं।

गेहूं और जौ की बुवाई की तैयारी करें

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में गेहूं की बुवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के मध्य तक की जा सकती है। इसके लिए गेहूं की एचएस-542 और वीएल-829 किस्मों की सिफारिश की गई है। जौ की खेती के लिए हिम पालम जौ-1, हिम पालम जौ-2 और एचबीएल-113 किस्में उपयुक्त बताई गई हैं। गेहूं के लिए प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम बीज की मात्रा निर्धारित की गई है। बुवाई से पहले बीज को अनुशंसित फफूंदनाशक से उपचारित करना भी जरूरी है, ताकि बीज से फैलने वाले रोगों का खतरा कम किया जा सके।

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चना, मसर और तिलहनी फसलों पर विशेष ध्यान

अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में चने की बुवाई भी की जा सकती है। इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या रेतीली मिट्टी बेहतर मानी गई है। हिमाचल चना-1, हिमाचल चना-2 और जीपीएफ-2 किस्मों की कतारों के बीच 30 सेंटीमीटर दूरी रखने की सलाह दी गई है, जबकि एचपीजी-17 के लिए 50 सेंटीमीटर दूरी निर्धारित की गई है। चने के बीज को लगभग 10 सेंटीमीटर गहराई पर बोने की सिफारिश की गई है। मसर की विपाशा और मारकंडे किस्में भी प्रदेश के लिए अनुमोदित हैं। इसके अतिरिक्त राया, गोभी सरसों, भूरी सरसों और अलसी की उपयुक्त किस्मों की बुवाई करने का सुझाव दिया गया है। Himachal farmers को सलाह दी गई है कि वे बीज की मात्रा, कतारों की दूरी और खाद का उपयोग संबंधित फसल की अनुशंसाओं के अनुसार करें।

सब्जियों की बुवाई और रोपाई का सही समय

निचले पर्वतीय क्षेत्रों में मटर की अगेती किस्मों, लहसुन, पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर और शलजम की बुवाई की जा सकती है। फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी, चीनी बंदगोभी और ब्रोकली की तैयार पौध की रोपाई भी इस समय की जा सकती है। मध्यवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में सब्जियों की रोपाई के साथ खेत में गोबर की खाद और अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। प्याज की नर्सरी तैयार करने के लिए भी यह उपयुक्त समय है। खेतों में निराई-गुड़ाई करते रहें और खरपतवार को नियंत्रित करें।

फसल सुरक्षा और बीज उपचार जरूरी

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने स्वस्थ पौध तैयार करने के लिए बीज उपचार और नर्सरी की स्वच्छता पर जोर दिया है। मटर में उखड़ा रोग तथा गेहूं और जौ में बीज से फैलने वाले रोगों की रोकथाम के लिए अनुशंसित बीज उपचार अपनाने की सलाह दी गई है। कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का प्रयोग केवल कृषि विशेषज्ञों की सलाह, उत्पाद के लेबल और निर्धारित सुरक्षा निर्देशों के अनुसार करें। Crop Protection के लिए दवाओं की मात्रा और उपयोग की विधि बिना विशेषज्ञ की सलाह के न बदलें।

पशुपालन, चारा और मछली पालन के लिए सुझाव

पशुपालकों को गौशाला की साफ-सफाई बनाए रखने, पशुओं को ठंड से बचाने और संतुलित आहार के साथ खनिज लवण देने की सलाह दी गई है। भूख कम होने, तेज बुखार, लंगड़ापन या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। नवजात बछड़ों को जन्म के एक से दो घंटे के भीतर उनके शरीर के वजन के अनुसार खीस पिलाना महत्वपूर्ण बताया गया है। घास को अच्छी तरह सुखाकर सुरक्षित रखने और हरे चारे से साइलेज बनाने की सलाह भी दी गई है। मछली पालकों को सुबह के समय तालाब में ताजा पानी उपलब्ध कराने या वातन यंत्रों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। मुर्गीपालकों को पक्षियों के लिए पर्याप्त रोशनी और सूखा बिछावन बनाए रखने की सलाह दी गई है।

किसानों को कहां से मिलेगी अधिक जानकारी?

विश्वविद्यालय ने किसानों और पशुपालकों से अपने क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क बनाए रखने का अनुरोध किया है। अधिक जानकारी के लिए कृषि तकनीकी सूचना केंद्र के दूरभाष नंबर 01894-230395 या टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर संपर्क किया जा सकता है।

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