Post by : Himachal Bureau
राजभवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. श्रीकांत बाल्दी द्वारा लिखित पुस्तक ‘माय हिमाचल, माय जर्नी’ का विमोचन किया। इस अवसर पर साहित्य, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पुस्तक की विषयवस्तु और हिमाचल प्रदेश से जुड़े अनुभवों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। यह पुस्तक डॉ. श्रीकांत बाल्दी के प्रशासनिक जीवन, उनके अनुभवों और हिमाचल प्रदेश के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।
पुस्तक में उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान देखे गए बदलावों, लोगों के जीवन, पहाड़ी संस्कृति और जनसेवा से जुड़े अनुभवों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। इसमें कई प्रेरणादायक घटनाओं और व्यक्तिगत अनुभवों को भी शामिल किया गया है, जो पाठकों को हिमाचल की संस्कृति और समाज के करीब ले जाते हैं। राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने पुस्तक के विमोचन के बाद डॉ. श्रीकांत बाल्दी को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की पुस्तकें समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव रखने वाले लोगों के विचार और अनुभव समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं। ऐसे साहित्यिक प्रयास युवाओं को भी प्रेरित करते हैं और उन्हें समाज तथा प्रशासन को बेहतर तरीके से समझने का अवसर देते हैं। राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और लोगों की सादगी के लिए पूरे देश में अलग पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पुस्तकें राज्य की संस्कृति, परंपराओं और जनजीवन को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पुस्तक में हिमाचल प्रदेश के बदलते स्वरूप, पहाड़ी क्षेत्रों की चुनौतियों और विकास से जुड़े अनुभवों को भी विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने अपने प्रशासनिक जीवन के दौरान सामने आई कई परिस्थितियों और उनसे जुड़े अनुभवों को पाठकों के सामने सरल और रोचक तरीके से रखने का प्रयास किया है। इसमें आम लोगों के साथ उनके जुड़ाव और जनहित के लिए किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया गया है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भी पुस्तक की सराहना की।
कई लोगों ने कहा कि यह पुस्तक केवल एक प्रशासनिक अधिकारी के अनुभवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हिमाचल की संस्कृति, लोगों की भावनाओं और पहाड़ी जीवन की झलक भी देखने को मिलती है। डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने कार्यक्रम के दौरान सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक लिखने का उद्देश्य अपने अनुभवों को लोगों तक पहुंचाना और हिमाचल प्रदेश के प्रति अपने जुड़ाव को साझा करना था। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक पाठकों को पसंद आएगी और उन्हें सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करेगी। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने लेखक को शुभकामनाएं दीं और पुस्तक की सफलता की कामना की।
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