कुल्लू में 2000 रुपये के लिए नाबालिग ने उठाया खौफनाक कदम, मौत
कुल्लू में 2000 रुपये के लिए नाबालिग ने उठाया खौफनाक कदम, मौत

Post by : Himachal Bureau

July 27, 2026 1 p.m. 330

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से एक बेहद दुखद और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां कुल्लू न्यूज़ के तहत सामने आई इस घटना में एक 16 वर्षीय नाबालिग ने कथित तौर पर 2000 रुपये नहीं मिलने से आहत होकर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और परिवार में चीख-पुकार मच गई।

भुंतर थाना क्षेत्र का है मामला

जानकारी के अनुसार यह मामला कुल्लू जिले के भुंतर थाना क्षेत्र का है। मृतक की पहचान ठाकुर दास उर्फ रोहित पुत्र लीलाधर निवासी गांव नंजा, डाकघर ठेला, तहसील भुंतर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि रोहित ने बीते 22 जुलाई को अपने घर में रखी खरपतवार नाशक दवा का सेवन कर लिया था। घटना के बाद जब उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी तो परिजनों को इसकी जानकारी मिली। परिवार के लोगों ने बिना देरी किए उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। गंभीर हालत को देखते हुए उसे आगे बेहतर उपचार के लिए हरिहर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उसका इलाज कर रही थी।

इलाज के दौरान तोड़ा दम

परिजनों और चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद रोहित की हालत में सुधार नहीं हो सका। 25 जुलाई को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। नाबालिग की मौत की खबर मिलते ही परिवार और गांव में मातम छा गया। बताया जा रहा है कि रोहित अपने दोस्तों के साथ काम की तलाश में जाने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए उसने अपनी मां मीरा देवी से 2000 रुपये मांगे थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसकी मां पैसे उपलब्ध नहीं करा सकीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इसी बात से नाराज होकर रोहित ने यह कदम उठाया।

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पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाया और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। यह घटना एक बार फिर बच्चों और युवाओं की मानसिक स्थिति को समझने तथा परिवारों में संवाद बनाए रखने की जरूरत को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी परेशानी या तनाव की स्थिति में बच्चों से बातचीत करना और उन्हें भावनात्मक सहयोग देना बेहद जरूरी है।

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