Author : Rajesh Vyas
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में अनुराग शर्मा का नामांकन किया है। इस नामांकन के बाद अनुराग शर्मा ने अपनी भावनाओं और उस पल के अनुभव को साझा किया, जिसने उनकी राजनीतिक यात्रा और उनके जीवन की दिशा दोनों को बदल दिया। उन्होंने इसे महज एक टिकट नहीं, बल्कि हिमाचल की सियासत में 'जमीनी कार्यकर्ता के पुनरुत्थान' के रूप में देखा।
अनुराग शर्मा ने बताया कि जब उन्हें शीर्ष नेतृत्व से कॉल आया, तब पूरा देश होली के रंगों में डूबा था। एआईसीसी (AICC) मुख्यालय से आए कॉल ने उन्हें चौंका दिया। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे राज्यसभा के लिए अपने दस्तावेज तैयार रखें और नामांकन की प्रक्रिया पूरी करें। उन्होंने कहा, "उस वक्त मुझे लगा जैसे मैं कोई स्वप्न देख रहा हूँ। यह पल मेरे लिए बेहद भावुक कर देने वाला था। पार्टी ने यह साबित किया कि संगठन में पद या रसूख नहीं, बल्कि निष्ठा और मेहनत सर्वोपरि है।"
अनुराग शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस आलाकमान का यह निर्णय भविष्य के लिए एक बड़ा संदेश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी मंत्री या विधायक से बड़ा पार्टी का कार्यकर्ता और संगठन होता है। यदि आज एक साधारण पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को यह अवसर मिला है, तो कल किसी भी समर्पित कार्यकर्ता का नंबर लग सकता है। उन्होंने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार का इस भरोसे के लिए धन्यवाद भी अदा किया।
राज्यसभा में अपनी संसदीय पारी की शुरुआत से पहले ही अनुराग शर्मा ने अपनी प्राथमिकताओं का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे हिमाचल के हितों की पुरजोर वकालत करेंगे। उनके पहले एजेंडे में प्रदेश के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान (RDG) है। इसके अलावा ग्रामीण विकास की दिशा में केंद्र से जवाब मांगने का उनका लक्ष्य है, विशेषकर मनरेगा योजना के तहत। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सांसद इन महत्वपूर्ण विषयों पर चुप्पी साधे हुए हैं और हिमाचल के साथ न्याय नहीं कर रहे।
आगामी चुनावी रणनीति के बारे में बात करते हुए अनुराग शर्मा ने कहा कि कांगड़ा जिला कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण किला बनेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि कांगड़ा की सभी 15 विधानसभा सीटें कांग्रेस के पक्ष में आएंगी। उनका यह भी कहना था कि पुराने कांग्रेसियों की तरह वे भी चुनाव के अंतिम दो महीनों में स्थिति बदलने की क्षमता रखते हैं।
अनुराग शर्मा ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि हिमाचल के कार्यकर्ताओं और आम जनता के हितों की आवाज बनना है। राज्यसभा में उनकी उपस्थिति का मतलब होगा कि हिमाचल प्रदेश की नीतियों और विकास कार्यों में कार्यकर्ताओं की प्राथमिकताओं को सर्वोच्च स्थान मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि RDG और मनरेगा जैसी योजनाओं को सुदृढ़ करना और केंद्र सरकार से उचित संसाधन सुनिश्चित करना उनकी पहली जिम्मेदारी होगी।
इसके साथ ही अनुराग शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस का संगठन किसी भी परिस्थिति में मजबूत रहेगा और प्रत्येक कार्यकर्ता को उनके अधिकार और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में उनके इस कदम को कार्यकर्ताओं और आम जनता दोनों द्वारा स्वागत किया जा रहा है।
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