हिमाचल में हरित ऊर्जा का नया युग; सरकारी खजाने में आए ₹1004 करोड़
हिमाचल में हरित ऊर्जा का नया युग; सरकारी खजाने में आए ₹1004 करोड़

Post by : Himachal Bureau

March 16, 2026 2:37 p.m. 118

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश 'हरित ऊर्जा राज्य' बनने की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार और नवाचारों पर दिए जा रहे बल के परिणामस्वरूप राज्य ने 2,534 मिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन कर 1,004 करोड़ रुपये से अधिक का शानदार राजस्व अर्जित किया है। वर्तमान में प्रदेश सरकार न केवल पारंपरिक जलविद्युत क्षमता को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोचार जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी नए आयाम स्थापित कर रही है।

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने आगामी दो वर्षों के भीतर 500 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।इस दिशा में जिला ऊना और बिलासपुर में संचालित पेखुबेला, भंजाल, अघलौर और बैरा डोल जैसी सौर परियोजनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लगभग 52 मेगावाट की कुल क्षमता वाली इन परियोजनाओं से अब तक 114.27 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ है, जिससे सरकारी खजाने में 34.83 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।राज्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में जलविद्युत परियोजनाएं आज भी आधारशिला बनी हुई हैं। कुल्लू जिले की 100 मेगावाट की सैंज परियोजना, किन्नौर की 65 मेगावाट की काशंग (चरण-एक) और शिमला जिले की 111 मेगावाट क्षमता वाली सावड़ा-कुड्डू परियोजना राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

इन प्रमुख परियोजनाओं ने संयुक्त रूप से 2,419.97 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर 969.95 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में 13 नई जलविद्युत परियोजनाओं के सफलतापूर्वक पूर्ण होने से राज्य की कुल उत्पादन क्षमता में 1,229 मेगावाट की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए नालागढ़ में एक मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा संयंत्र विकसित किया जा रहा है, जो भविष्य के स्वच्छ ईंधन की राह प्रशस्त करेगा। साथ ही, नेरी में देश का पहला राज्य-समर्थित 'बायोचार कार्यक्रम' भी प्रारंभ किया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल है।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने 250 किलोवाट से लेकर 5 मेगावाट तक की परियोजनाएं निवेशकों के लिए उपलब्ध कराई हैं। इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा खरीदने की गारंटी दी गई है। अब तक 547 निवेशकों को 595.97 मेगावाट क्षमता की ग्राउंड-माउंटेड सौर परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं। इसके अलावा, हिमऊर्जा के माध्यम से हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को 728.4 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं दी गई हैं, जिनमें से 150.13 मेगावाट पर कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। निवेशकों को लुभाने के लिए लघु जलविद्युत परियोजनाओं (25 मेगावाट तक) पर रॉयल्टी की दरों को 18% और 30% से घटाकर मात्र 12% कर दिया गया है, जिससे निजी क्षेत्र में निवेश बढ़ने की प्रबल संभावना है।

सरकार ने विकास के साथ-साथ परियोजना प्रभावितों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा है, जिसके तहत प्रभावित परिवारों को 25.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को एक बड़ी कानूनी जीत भी हासिल हुई है, जब सर्वोच्च न्यायालय ने कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना के रॉयल्टी विवाद में हिमाचल प्रदेश के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। इन सभी ठोस कदमों और नीतिगत सुधारों से स्पष्ट है कि हिमाचल प्रदेश न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रहा है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है।

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