हिमाचल के डिपुओं में राशन की मात्रा पर सवाल जांच में आटे की बोरियों में कमी मिली
हिमाचल के डिपुओं में राशन की मात्रा पर सवाल  जांच में आटे की बोरियों में कमी मिली

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June 13, 2026 1:10 p.m. 523

राशन वितरण पर उठे सवाल, जांच में आटे की बोरियों में मिली कमी; रिपोर्ट भेजी गई

हिमाचल Pradesh में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन डिपुओं को भेजी जा रही खाद्य सामग्री की मात्रा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में हुई जांच के दौरान कुछ सीलबंद आटे की बोरियों में निर्धारित वजन से कमी पाए जाने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। जांच के बाद संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भी भेज दी गई है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब लंबे समय से राशन डिपो संचालकों और उपभोक्ताओं की ओर से खाद्य सामग्री के वजन में कमी को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।

जांच के दौरान सामने आई वजन में कमी

जानकारी के अनुसार, सिविल सप्लाई कारपोरेशन की एक टीम राशन की गुणवत्ता और वजन की जांच के लिए एक डिपो पर पहुंची थी। इस दौरान जब सीलबंद आटे की बोरियों का वजन किया गया, तो उनमें निर्धारित मात्रा से करीब 300 ग्राम से अधिक की कमी पाई गई।

इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने मामले की रिपोर्ट तैयार कर उच्च स्तर पर भेज दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

प्रदेश के विभिन्न जिलों से समय-समय पर राशन के वजन में कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। कुल्लू, कांगड़ा, हमीरपुर और चंबा के कई क्षेत्रों में डिपो संचालकों द्वारा सीलबंद बोरियों का वजन कर तस्वीरें साझा की गई थीं, जिनमें कुछ मामलों में कई किलोग्राम तक का अंतर दिखाई दिया था।

इन शिकायतों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

तेल की मात्रा को लेकर भी शिकायतें

आटा और चावल के अलावा खाद्य तेल की आपूर्ति को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। कुछ डिपो संचालकों का आरोप है कि 12 लीटर क्षमता वाली कुछ पेटियों में अपेक्षा से कम मात्रा में तेल पाया गया।

हालांकि, संबंधित विभागों को इस संबंध में पहले भी शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है।

सप्लाई प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल

अधिकारियों का कहना है कि खाद्यान्न की आपूर्ति विभिन्न स्रोतों से की जाती है और ट्रकों के स्तर पर वजन की जांच भी की जाती है। वहीं, डिपो संचालकों का मानना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हो रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार इकाइयों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और नियमित निगरानी बेहद आवश्यक है, क्योंकि इसका सीधा असर लाखों राशन कार्ड धारकों और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ता है।

अब विभागीय रिपोर्ट सामने आने के बाद सभी की नजरें इस बात पर हैं कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

हिमाचल प्रदेश के कुछ राशन डिपुओं में सप्लाई किए जा रहे राशन की मात्रा को लेकर सवाल उठे हैं। जांच के दौरान कुछ सीलबंद आटे की बोरियों में निर्धारित वजन से कमी पाई गई, जिसके बाद सिविल सप्लाई कारपोरेशन की टीम ने रिपोर्ट तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेज दी है। मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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