धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन तेज, संसद से जंतर-मंतर तक हंगामा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन तेज, संसद से जंतर-मंतर तक हंगामा

Post by : Himachal Bureau

July 23, 2026 10:46 a.m. 183

नई दिल्ली में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदर्शनकारी संगठनों और विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। संसद परिसर से लेकर जंतर-मंतर तक विरोध प्रदर्शन जारी है, जबकि मानसून सत्र के दौरान भी इस मुद्दे को लेकर लगातार राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो उसे आंदोलन स्थल पर आकर खुले संवाद के लिए तैयार होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केवल औपचारिक बैठक बुलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाना होगा।

NEET Paper Leak मामले को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद

आंदोलन की मुख्य वजह NEET Paper Leak को लेकर उठे सवाल और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग है। प्रदर्शनकारी लगातार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस मामले से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसलिए केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।

Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि Dharmendra Pradhan के इस्तीफे से कम किसी भी समाधान को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि सरकार यदि गंभीर है तो उसे पहले इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। उनका दावा है कि हजारों छात्र और समर्थक अब भी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हैं और आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चलाया जाएगा।

संसद में लगातार तीसरे दिन हंगामा

इस पूरे घटनाक्रम का असर संसद की कार्यवाही पर भी साफ दिखाई दिया। विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा विवाद पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हुए। सरकार की ओर से कहा गया कि वह सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन चर्चा संसदीय नियमों के अनुसार ही होगी। वहीं विपक्ष का कहना है कि पहले जिम्मेदारी तय की जाए, उसके बाद ही सार्थक बहस संभव है।

Parliament Protest के बीच बढ़ा सियासी टकराव

Parliament Protest के दौरान विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर के बाहर भी प्रदर्शन किया। उनके हाथों में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर और तख्तियां थीं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों के मुद्दे पर गंभीर नहीं है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर संसद की कार्यवाही बाधित कर रहा है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है और इस मुद्दे पर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तनाव

शाम के समय जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। हालांकि आंदोलन से जुड़े नेताओं ने दोहराया कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और किसी भी प्रकार की हिंसा आंदोलन का हिस्सा नहीं है।

Sonam Wangchuk ने अनशन समाप्त करने के लिए रखीं शर्तें

आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk ने अपने अनशन को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार कुछ प्रमुख मांगों पर सकारात्मक आश्वासन देती है तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने मांग की कि परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को उचित सहायता दी जाए, पूरे मामले पर संसद में गंभीर चर्चा कराई जाए और आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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आगे क्या होगा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच जल्द संवाद स्थापित नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह विवाद और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल आंदोलनकारी अपने रुख पर कायम हैं और सरकार भी संसदीय प्रक्रिया के तहत समाधान निकालने की बात कह रही है। देशभर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत के जरिए गतिरोध समाप्त होगा या फिर आंदोलन और राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज होगा।

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