चंबा में दर्दनाक हादसा, पैर फिसलने से खाई में गिरकर गृह रक्षक की मौत
चंबा में दर्दनाक हादसा, पैर फिसलने से खाई में गिरकर गृह रक्षक की मौत

Post by : Himachal Bureau

May 30, 2026 1:18 p.m. 121

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से एक बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। एक गृह रक्षक जवान, जो रोज की तरह बाजार से अपने घर लौट रहा था, घर पहुंचने से कुछ ही दूरी पहले एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया। बताया जा रहा है कि घर से मात्र 100 मीटर पहले उसका पैर फिसल गया और वह गहरी खाई में जा गिरा। इस हादसे में उसकी जान चली गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है, जबकि मृतक के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

मृतक की पहचान 46 वर्षीय प्रकाश चंद पुत्र विश्वेश्वर निवासी शक्तिदेहरा (लाहड़ी), पंचायत निहुई, जिला चंबा के रूप में हुई है। प्रकाश चंद गृह रक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने वाले एक मेहनती और जिम्मेदार व्यक्ति माने जाते थे। उनके असमय निधन से न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम को प्रकाश चंद किसी जरूरी काम से बाजार गए हुए थे। काम निपटाने के बाद वह देर शाम अपने घर की ओर लौट रहे थे। जब वह अपने घर के बिल्कुल नजदीक पहुंच चुके थे और घर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर थे, तभी रास्ते में एक डंगे (रिटेनिंग वॉल) के पास उनका संतुलन बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि अचानक पैर फिसलने के कारण वह खुद को संभाल नहीं पाए और करीब 30 फीट गहरी खाई में जा गिरे।

हादसा इतनी तेजी से हुआ कि उन्हें संभलने का कोई मौका नहीं मिला। खाई में गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह वहीं बेसुध पड़े रहे। अंधेरा होने के कारण किसी को भी इस घटना की जानकारी नहीं मिल सकी। रात के समय जब कुछ ग्रामीण अपने काम से वापस लौट रहे थे, तब उनकी नजर खाई में पड़े प्रकाश चंद पर पड़ी। उन्हें देखते ही ग्रामीणों के होश उड़ गए और तुरंत परिजनों को इसकी सूचना दी गई।

घटना की खबर मिलते ही परिवार के सदस्य और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद प्रकाश चंद को खाई से बाहर निकाला। उस समय उनकी हालत बेहद गंभीर थी। परिजन और ग्रामीण उन्हें तुरंत उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा लेकर रवाना हुए। रास्ते भर सभी उनकी जान बचने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

प्रकाश चंद की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि प्रकाश चंद बेहद मिलनसार और मददगार स्वभाव के व्यक्ति थे। वह हमेशा लोगों की सहायता के लिए तैयार रहते थे और समाज में उनकी एक अच्छी पहचान थी।

शुक्रवार को गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और स्थानीय लोग शामिल हुए। सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे गांव में मातम का माहौल रहा और हर कोई इस दर्दनाक हादसे को लेकर दुख व्यक्त करता नजर आया।

पूर्व प्रधान मुकेश कुमारी ने बताया कि प्रकाश चंद अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनके कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। उनकी अचानक मौत ने परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से गहरे संकट में डाल दिया है। परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा छिन जाने से परिजनों के सामने भविष्य को लेकर कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

मृतक अपने पीछे बुजुर्ग मां, पत्नी, दो बेटियां और एक बेटे को छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी 24 वर्ष की है जबकि दूसरी बेटी 22 वर्ष की है। इसके अलावा उनका 19 वर्षीय बेटा भी है, जिसकी पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी अब परिवार के सामने एक बड़ी चिंता बन गई है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि घर लौटते समय इतना बड़ा हादसा हो जाएगा और परिवार का सहारा हमेशा के लिए उनसे दूर चला जाएगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि इस कठिन समय में उन्हें कुछ राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि प्रकाश चंद एक मेहनती और जिम्मेदार व्यक्ति थे, जिन्होंने हमेशा अपने परिवार और समाज के लिए ईमानदारी से काम किया। ऐसे में उनके परिवार को हर संभव सहायता मिलनी चाहिए।

यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में पैदल आवाजाही के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की याद दिलाता है। पहाड़ी रास्तों पर जरा सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। हालांकि इस घटना ने केवल एक व्यक्ति की जान नहीं ली, बल्कि एक पूरे परिवार से उसका सहारा भी छीन लिया। चंबा के शक्तिदेहरा गांव में आज हर आंख नम है और हर कोई यही कह रहा है कि घर से कुछ कदम पहले आई यह मौत पूरे परिवार के लिए कभी न भरने वाला घाव छोड़ गई है।

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