Post by : Himachal Bureau
नेपाल में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो गया है। 35 साल के बालेन्द्र शाह, जिन्हें लोग बालेन शाह के नाम से भी जानते हैं, अब नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री बन गए हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। बालेन्द्र शाह का यह सफर बहुत खास माना जा रहा है क्योंकि वे पहले एक रैपर थे और अब देश के सबसे बड़े पद तक पहुंच गए हैं। उन्हें नेपाल का सबसे युवा प्रधानमंत्री भी कहा जा रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बालेन्द्र शाह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह नियुक्ति नेपाल की जनता के भरोसे को दिखाती है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्तों को और मजबूत करने के लिए वह बालेन्द्र शाह के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। बालेन्द्र शाह का जन्म 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में हुआ था। वे एक नेवार बौद्ध परिवार से आते हैं। उनके पिता आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। उन्होंने काठमांडू के एक कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में भारत के बेंगलुरु से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की।
राजनीति में आने से पहले बालेन्द्र शाह एक मशहूर रैपर थे। उन्होंने अंडरग्राउंड हिप-हॉप संगीत में काफी पहचान बनाई। उनके गानों में भ्रष्टाचार, गरीबी, असमानता और युवाओं की समस्याओं को उठाया जाता था। उनके गाने “सड़क बालक” और रैप बैटल शो “रॉ बार्ज़” ने उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया। साल 2021 में उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव लड़ने का ऐलान किया। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने जनता से सीधा जुड़ाव बनाया और भ्रष्टाचार, सफाई व्यवस्था, ट्रैफिक और शहर के विकास जैसे मुद्दों पर जोर दिया।
2022 में वे काठमांडू के मेयर चुने गए और बिना किसी पार्टी के जीतने वाले पहले व्यक्ति बने। उनके काम को लेकर कुछ विवाद भी हुए, खासकर अतिक्रमण हटाने और सड़क विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर, लेकिन फिर भी उनकी लोकप्रियता बनी रही। 2025 में नेपाल में बड़े युवा आंदोलन हुए, जिन्हें जेनरेशन-जेड आंदोलन कहा गया। इन प्रदर्शनों के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और पुरानी सरकार गिर गई। इस दौरान बालेन्द्र शाह युवाओं के एक प्रमुख नेता के रूप में सामने आए।
इसके बाद उन्होंने राजनीति में और आगे कदम बढ़ाया। 2025 के अंत में वे एक राजनीतिक पार्टी में शामिल हुए और 2026 में मेयर पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रीय राजनीति में आए। मार्च 2026 के चुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी सफलता मिली और उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया। आज बालेन्द्र शाह को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है जो युवाओं की आवाज को आगे बढ़ाते हैं। हालांकि उनकी तेज और आक्रामक राजनीति को लेकर कुछ आलोचना भी होती है, लेकिन बड़ी युवा आबादी उन्हें एक नए और अलग नेतृत्व के रूप में देखती है।
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