Author : Beli Ram Ani, District Kullu
जितेंद्र कुमार का आरोप है कि जब गाड़ी शुरू से ही टैक्सी पर्पज के लिए बीमित थी और RTO रिकॉर्ड के अनुसार कागज़ पूरे हैं, तो परमिट की तारीख का सहारा लेकर क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी की मनमानी और हरासमेंट है। दूसरी ओर कंपनी का पक्ष यह है कि कमर्शियल वाहन के लिए वैध परमिट न होना पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है, इसलिए क्लेम नहीं दिया जा सकता। मामला अब न्यायालय में पहुंच चुका है और पीड़ित टैक्सी ऑपरेटर ने सरकार व प्रशासन से निष्पक्ष जांच और भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्ट नियम व पारदर्शिता की मांग की है। इस वीडियो में हम आपको दोनों पक्षों की बात और मोटर बीमा क्लेम रिजेक्शन से जुड़े नियमों की हकीकत बताएंगे।
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