Author : Sourabh Jain
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान' के अंतर्गत सोलन जिले के नालागढ़ उपमंडल की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजपुरा में नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) नालागढ़ नरेंद्र आहलूवालिया ने की। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और यदि वे नशे जैसी बुराइयों से दूर रहेंगे तो समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जीवन का स्पष्ट लक्ष्य तय कर शिक्षा, अनुशासन और मेहनत के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि राज्य सरकार का 'चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान' केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाकर युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकना भी है। अधिकारियों ने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह स्वयं नशे से दूर रहे और दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को चिट्टा सहित विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि नशे की लत व्यक्ति की निर्णय क्षमता को प्रभावित करती है और उसका भविष्य अंधकारमय बना सकती है। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की चपेट में है तो उसे सही मार्गदर्शन और उपचार दिलाने का प्रयास करना चाहिए। समाज की सामूहिक भागीदारी से ही नशे जैसी समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
एसडीएम नरेंद्र आहलूवालिया ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, मेहनत और सकारात्मक सोच सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन में न आएं और अपने माता-पिता तथा शिक्षकों के विश्वास पर हमेशा खरा उतरें। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा यदि सही दिशा में लगाई जाए तो वे समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। शिक्षा और संस्कार ही युवाओं को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और उपस्थित अधिकारियों को नशा न करने तथा दूसरों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने की शपथ दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे। विद्यालय प्रबंधन ने भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया ताकि विद्यार्थियों को सामाजिक बुराइयों से बचाया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार और समाज में नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाए तो आने वाले समय में प्रदेश को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। विद्यार्थियों ने भी इस अभियान को आगे बढ़ाने और अपने मित्रों व परिवार के बीच जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
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