Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में एक बड़ा साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें 78 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी और उनकी पत्नी लगभग 20 घंटे तक “डिजिटल अरेस्ट” जैसी झूठी कॉल के डर में रहे। ठगों ने खुद को एंटी-टेररिस्ट अधिकारी बताया और दंपती को डराने के लिए उनके बैंक खाते को आतंकवाद से जोड़ने का झूठा आरोप लगाया।
ठगों ने दंपती से बार-बार कॉल कर उनके खाते की जानकारी और OTP मांगी, ताकि राशि ट्रांसफर की जा सके। दंपती डर और दबाव में आकर लगभग ₹80,000 देने वाले थे, लेकिन बैंक प्रबंधक की सतर्कता ने समय रहते राशि को सुरक्षित कर दिया।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और लोग कभी भी अनजान कॉल या संदेश पर भरोसा न करें। उन्होंने लोगों को चेताया कि बैंक या सरकारी अधिकारी जैसी कॉल आने पर हमेशा सही स्रोत से पुष्टि करें और निजी जानकारी साझा न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग दिन-प्रतिदिन नए तरीके अपनाते हैं, जैसे डराना, धमकाना या फर्जी कानूनी कार्रवाई का हवाला देना। इस घटना से यह भी सीख मिलती है कि सावधानी और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
बैंक और पुलिस ने मिलकर दंपती को साइबर सुरक्षा और सुरक्षित बैंकिंग के टिप्स भी दिए। लोगों से अपील की गई कि किसी भी संदेहजनक कॉल या मैसेज पर तुरंत कार्रवाई करने से पहले अपने बैंक या पुलिस से संपर्क करें।
यह घटना दिखाती है कि साइबर ठगी हर उम्र के लोगों के लिए खतरा बन सकती है। समय पर सतर्कता और बैंक अधिकारियों की मदद से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
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