Post by : Himachal Bureau
शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में आयोजित दो दिवसीय रश्मिरथी पर्व के उद्घाटन अवसर पर राज्यपाल शिविंदर गुप्ता ने कहा कि महान साहित्यकारों और राष्ट्रनिर्माताओं के विचार आज भी समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समान अवसर, राष्ट्रीय एकता और मानवीय मूल्यों को अपनाना ही राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे साहित्य में निहित संदेशों को केवल पढ़ने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी उतारें।
रश्मिरथी के हीरक जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, विद्यार्थी, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक महान काव्य कृति का स्मरण करना नहीं था, बल्कि उसके माध्यम से समाज में सकारात्मक मूल्यों के प्रसार को भी बढ़ावा देना था। इस दौरान रामधारी सिंह दिनकर की साहित्यिक विरासत और उनके राष्ट्रवादी चिंतन पर विस्तार से चर्चा की गई।
राज्यपाल ने कहा कि भारत के इतिहास में कई ऐसे महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से देश की चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं में आत्मविश्वास और जागरूकता का संचार किया, जबकि अन्य राष्ट्रीय नेताओं ने समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। इन सभी महान व्यक्तित्वों का लक्ष्य राष्ट्रहित और मानवता की सेवा रहा।
उन्होंने रश्मिरथी के प्रमुख पात्र कर्ण का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्ण का जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। आज के युवाओं के लिए उनके जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना ही सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि युवाओं को ज्ञान, मेहनत और नवाचार के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन साथ ही अपनी संस्कृति, भाषा और मूल्यों को भी नहीं भूलना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान रश्मिरथी पर्व की महत्ता पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि दिनकर की रचनाएं आज भी समाज को जोड़ने और नई सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस अवसर पर ‘रश्मिरथी से संवाद’ नामक स्मारिका का विमोचन भी किया गया, जिसमें दिनकर के साहित्य और विचारों पर विभिन्न लेख संकलित किए गए हैं। समारोह में आयोजित नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। कलाकारों ने कर्ण के जीवन और संघर्ष को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों का प्रभावशाली चित्रण देखने को मिला।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि दिनकर के विचार और उनकी अमर कृतियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी तथा राष्ट्र निर्माण के मार्ग में मार्गदर्शक सिद्ध होंगी।
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