'सतलुज' फिल्म हटी, लेकिन रुक नहीं सकी! पंजाब के गांवों में लोग खुद कर रहे स्क्रीनिंग
'सतलुज' फिल्म हटी, लेकिन रुक नहीं सकी! पंजाब के गांवों में लोग खुद कर रहे स्क्रीनिंग

Post by : Himachal Bureau

July 9, 2026 12:17 p.m. 321

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। पहले यह फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थी, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया। इसके बाद पंजाब के कई गांवों में स्थानीय स्तर पर इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई। बड़ी एलईडी स्क्रीन और प्रोजेक्टर के जरिए रात के समय लोगों को फिल्म दिखाई जा रही है। इस घटनाक्रम के बाद फिल्म और उससे जुड़े विषयों पर लोगों के बीच चर्चा और तेज हो गई है।

कई गांवों में सार्वजनिक स्क्रीनिंग का आयोजन

जानकारी के अनुसार, पंजाब के माझा क्षेत्र के कई गांवों में स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों ने मिलकर फिल्म दिखाने की व्यवस्था की। गुरदासपुर जिले के शेखूपुरा और पंजबड़ गांवों में गुरुद्वारों के प्रांगण में बड़ी स्क्रीन लगाकर फिल्म दिखाई गई। स्क्रीनिंग देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और संगत मौजूद रही।

इसी तरह अमृतसर जिले के पंडोरी गांव और तरनतारन जिले के कुछ अन्य गांवों में भी लोगों ने एकत्र होकर फिल्म देखी। कई स्थानों पर खुले मैदानों में एलईडी स्क्रीन लगाई गई, जबकि कुछ जगहों पर प्रोजेक्टर का इस्तेमाल किया गया।

स्थानीय संगठनों का मिला सहयोग

फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग में कई स्थानीय युवा समूहों के साथ सामाजिक, धार्मिक और किसान संगठनों ने भी सहयोग किया। आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य लोगों को फिल्म देखने का अवसर देना है। गुरदासपुर जिले में खेल प्रमोटर सुल्तान सिंह ने भी अपने पैतृक गांव में खिलाड़ियों और ग्रामीणों के लिए विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन कराया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

अन्य गांवों में भी बनाई गई योजना

इस बीच कुछ स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि अलग-अलग जिलों के अन्य गांवों में भी फिल्म की स्क्रीनिंग की योजना बनाई गई। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में और अधिक स्थानों पर लोगों के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। आयोजकों के अनुसार, जहां भी स्क्रीनिंग हो रही है, वहां बड़ी संख्या में लोग फिल्म देखने पहुंच रहे हैं।

फिल्म हटने के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?

फिल्म के डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटने के बाद इसकी चर्चा और अधिक बढ़ गई। कई लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ संगठनों का कहना है कि फिल्म को देखने के इच्छुक लोगों तक इसे पहुंचाने के लिए सार्वजनिक स्क्रीनिंग की जा रही है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भी बहस को तेज कर दिया है।

फिल्म से जुड़े मुद्दे पर अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। इसी वजह से यह मामला केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अभिव्यक्ति, इतिहास और सार्वजनिक चर्चा का विषय भी बन गया है।

जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है फिल्म

यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित बताई जाती है। फिल्म में उनके जीवन से जुड़े कई घटनाक्रमों को दिखाया गया है। इस वजह से फिल्म को लेकर लोगों की उत्सुकता पहले से ही बनी हुई थी। डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटने के बाद यह उत्सुकता और बढ़ गई, जिसके चलते कई स्थानों पर सामूहिक रूप से फिल्म दिखाई जाने लगी।

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दिलजीत दोसांझ ने निभाई मुख्य भूमिका

फिल्म में अभिनेता दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में नजर आए हैं। उनके अभिनय को लेकर भी लोगों के बीच काफी चर्चा रही है। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ ही समय में इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद अलग-अलग संगठनों और स्थानीय समूहों ने डाउनलोड की गई प्रतियों के माध्यम से गांव-गांव स्क्रीनिंग शुरू कर दी।

पंजाब के विभिन्न हिस्सों में हो रही सार्वजनिक स्क्रीनिंग के कारण 'सतलुज' एक बार फिर सुर्खियों में है। कई गांवों में लोग एक साथ फिल्म देखने पहुंच रहे हैं और इसके विषय पर चर्चा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में भी अलग-अलग स्थानों पर ऐसी स्क्रीनिंग होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच फिल्म को लेकर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे यह मामला सार्वजनिक चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

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