Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव को लेकर धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार देवकारज की शुरुआत करते हुए बड़ा देव कमरुनाग अपने पारंपरिक लाव-लश्कर के साथ गोत गांव से मंडी के लिए रवाना हो गए हैं। देवताओं की यह यात्रा क्षेत्र में आस्था और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं।
मान्यता है कि बड़ा देव कमरुनाग के मंडी पहुंचने के साथ ही महोत्सव का विधिवत शुभारंभ होता है। इस बार भी देवता के आगमन के बाद 14 फरवरी से महोत्सव की औपचारिक शुरुआत होगी। महोत्सव के दौरान प्रदेश भर से देवी-देवताओं की झांकियां और धार्मिक शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जिससे पूरा मंडी शहर धार्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंग जाता है।
देव परंपरा के अनुसार यात्रा के दौरान कमरुनाग देव यजमानों और श्रद्धालुओं के घरों में जाकर उनकी मेहमाननवाजी स्वीकार करते हैं। इसे स्थानीय संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है। इस दौरान देवता के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव मंडी की पहचान बन चुका है। इस मेले में देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य और पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन भी किया जाता है, जिससे हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
प्रशासन की ओर से भी महोत्सव को सफल बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह महोत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है।
महाशिवरात्रि पर्व भगवान शिव की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है और इस अवसर पर आयोजित मंडी का यह अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव देव संस्कृति और आस्था का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। आने वाले दिनों में देवताओं के आगमन और धार्मिक कार्यक्रमों से मंडी में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिलेगा।
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