वाद्ययंत्रों की गूंज से देवमय हुई तीर्थन घाटी, गुशैनी में ब्रेलंगा मेले की धूम
वाद्ययंत्रों की गूंज से देवमय हुई तीर्थन घाटी, गुशैनी में ब्रेलंगा मेले की धूम

Author : Prem Sagar

Sept. 28, 2026 12:41 p.m. 124

कुल्लू जिले के बंजार उपमंडल की तीर्थन घाटी में देव परंपरा और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। घाटी के केंद्र गुशैनी में आश्विन माह की 10 प्रविष्टे को आयोजित होने वाला पारंपरिक ब्रेलंगा मेला इस बार भी धार्मिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। मेले में तीर्थन घाटी के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे, जबकि कुछ पर्यटकों ने भी आयोजन में हिस्सा लिया।

कई देवी-देवताओं ने किया देव मिलन

ब्रेलंगा मेले में तीर्थन घाटी की आराध्य देवी माता गाड़ा दुर्गा सहित कई देवी-देवताओं ने अपने-अपने सैकड़ों हारियानों के साथ शिरकत की। इनमें गांव पेखड़ी के देवता लोमश ऋषि, गांव नाहीं के देवता चौरासी सिद्ध, गांव तिंदर के देवता लक्ष्मी नारायण, गांव फरियाडी के देवता लक्ष्मी नारायण और गांव जन्हार के देवता विमु नाग शामिल रहे। देवरथों के साथ पहुंचे हारियानों और देवलुओं की मौजूदगी ने मेले के धार्मिक स्वरूप को और खास बना दिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच देवताओं का आगमन पूरे आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।

Read Also: सैंज घाटी के देहुरी गांव में पहुंचा श्री हरि मंदिर रथ, ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर किया स्वागत

माता की पालकी के बाद शुरू होता है देव मिलन

ब्रेलंगा मेले की अपनी विशेष देव परंपरा है। यहां माता गाड़ा दुर्गा की पालकी के गुशैनी मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले अन्य देवी-देवताओं का आगमन नहीं होता। माता की पालकी के पहुंचने के बाद ही अन्य देवी-देवता अपने देवलुओं और हारियानों के साथ ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर देव मिलन में शामिल होते हैं। इस पारंपरिक प्रक्रिया के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। देव मिलन और पूजा-अर्चना की धार्मिक प्रक्रिया के बाद मेले में लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।

नाटी में जमकर झूमे ग्रामीण

देव मिलन के बाद पारंपरिक लोक नृत्य नाटी का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर ग्रामीणों ने नाटी डालकर तीर्थन घाटी की लोक संस्कृति की झलक पेश की। मेले में धार्मिक गतिविधियों के साथ ग्रामीणों के बीच मेलजोल और आपसी भाईचारे का माहौल भी देखने को मिला। घाटी के अलग-अलग गांवों से आए लोगों ने एक साथ इस पारंपरिक आयोजन का हिस्सा बनकर अपनी देव संस्कृति से जुड़ाव को दर्शाया।

देव संस्कृति और पर्यटन का संगम

ब्रेलंगा मेला तीर्थन घाटी की पुरानी देव परंपराओं और लोक संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। ऐसे मेलों के माध्यम से स्थानीय लोग अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहे हैं। तीर्थन घाटी पर्यटन के लिए भी जानी जाती है। ऐसे पारंपरिक आयोजन यहां आने वाले पर्यटकों को स्थानीय देव संस्कृति और लोक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर देते हैं। ब्रेलंगा मेले ने एक बार फिर तीर्थन घाटी की धार्मिक आस्था, देव परंपरा, लोक नृत्य और सामाजिक एकता की झलक प्रस्तुत की।

#हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #ताज़ा खबरें #हिमाचल प्रदेश संस्कृति #हिमाचल मेले और त्योहार #कुल्लू
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
मोनिका ठाकुर ने CSIR NET JRF में हासिल की ऑल इंडिया 65वीं रैंक, सराज का नाम किया रोशन 1 सितंबर 1972 को कांगड़ा से अलग बना था हमीरपुर जिला, जानें इतिहास बिजली महादेव मंदिर में चला सफाई अभियान, 2 क्विंटल प्लास्टिक कचरा हटाया हिमाचल में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज नेपाल में फंसे हिमाचलियों की जानकारी दें, प्रशासन ने जारी किए निर्देश मणिमहेश यात्रा के पहले दिन 253 श्रद्धालु हुए रवाना, 20 सितंबर तक चलेगी यात्रा हिमाचल में स्वाइन फ्लू की दस्तक, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज हथलौंण की बेटी शिल्पा सोनी का चयन, बंगाणा में बनेंगी रसायन प्रवक्ता