वन्यजीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा, संरक्षण हमारा कर्तव्य: बासु कौशल
वन्यजीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा, संरक्षण हमारा कर्तव्य: बासु कौशल

Author : Rajesh Vyas

Oct. 5, 2026 5:51 p.m. 120

धर्मशाला में वन्यजीव सप्ताह के तहत नुक्कड़ नाटक, बर्ड वॉचिंग, नेचर वॉक और पेंटिंग प्रतियोगिता से दिया संरक्षण का संदेश

वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान

धर्मशाला, 5 अक्तूबर। वन्यजीवों के संरक्षण, जैव विविधता के महत्व और प्रकृति तथा मानव जीवन के बीच संतुलन को लेकर वन विभाग की ओर से वन्यजीव सप्ताह के तहत जिले में विभिन्न जागरूकता एवं सहभागिता आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य आम लोगों, विद्यार्थियों और युवाओं को वन्यजीवों के महत्व तथा उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इसी कड़ी में सोमवार को कचहरी अड्डा धर्मशाला में नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। फोक मीडिया कलाकारों ने प्रस्तुति के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में वन अधिकारियों के साथ स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया और व्हाइट बोर्ड पर वन्यजीव संरक्षण को लेकर अपने संदेश लिखे।

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2 से 8 अक्तूबर तक मनाया जा रहा वन्यजीव सप्ताह

मुख्य अरण्यपाल बासु कौशल ने बताया कि इस वर्ष वन्यजीव सप्ताह 2 से 8 अक्तूबर तक मनाया जा रहा है। इसका थीम ‘स्वास्थ्य और आजीविका के संरक्षण के लिए वन्यजीवों का संरक्षण’ रखा गया है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण के बिना स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण की कल्पना नहीं की जा सकती। इसी उद्देश्य से सप्ताह के दौरान जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में विद्यार्थियों, युवाओं और स्थानीय लोगों की सहभागिता से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

नुक्कड़ नाटक से अवैध शिकार रोकने का संदेश

वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को वन्यजीवों के संरक्षण और अवैध शिकार की रोकथाम का संदेश दिया जा रहा है। इसके अलावा वन क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखने के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। वन विभाग का उद्देश्य इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों को यह समझाना है कि वन्यजीवों और उनके आवासों का संरक्षण केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बर्ड वॉचिंग और नेचर वॉक से प्रकृति को समझने का मौका

सप्ताह के दौरान बर्ड वॉचिंग और नेचर वॉक जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। इनके माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय जैव विविधता से परिचित करवाया जा रहा है। प्रतिभागियों को विभिन्न पक्षी प्रजातियों, वनस्पतियों और प्राकृतिक आवासों के बारे में जानकारी दी जा रही है। वन विभाग का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से युवा पीढ़ी को प्रकृति को करीब से समझने और उसके संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने का अवसर मिलता है।

संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी: डीएफओ

डीएफओ अमित शर्मा ने कहा कि वन्यजीव सप्ताह की गतिविधियां केवल एक सप्ताह तक चलने वाला जागरूकता अभियान नहीं हैं। इनका उद्देश्य लोगों में प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर स्थायी भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाने के लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से जंगलों में स्वच्छता बनाए रखने, वनाग्नि की घटनाओं को रोकने और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने की अपील की।

पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने दिया संरक्षण का संदेश

वन्यजीव संरक्षण विषय पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। बच्चों ने अपनी चित्रकला के माध्यम से वन्यजीवों, जंगलों और प्रकृति के संरक्षण का संदेश प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों को कार्यक्रम के दौरान पुरस्कृत भी किया गया। इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने बच्चों और अन्य प्रतिभागियों से संवाद कर वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी साझा की। कार्यक्रम में पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गर्ल्स धर्मशाला से भावना, वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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