माता-पिता के निधन के बाद रोहित को सुखाश्रय योजना से मिला सहारा
माता-पिता के निधन के बाद रोहित को सुखाश्रय योजना से मिला सहारा

Post by : Himachal Bureau

June 15, 2026 5:19 p.m. 111

पालमपुर क्षेत्र के नच्छीर पंचायत के झंझाडला गांव के रहने वाले रोहित के जीवन में उस समय गहरा संकट आ गया जब बचपन में ही उसके माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। माता-पिता के जाने के बाद रोहित के सामने जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हो गईं। न तो रहने के लिए पक्का घर था और न ही रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का कोई स्थायी साधन। ऐसे कठिन समय में सरकार की एक विशेष योजना ने उसके जीवन में नई उम्मीद जगाई।

माता-पिता के निधन के बाद रोहित की स्थिति बेहद कमजोर हो गई थी। पुराना घर जर्जर हालत में था और सिर छुपाने के लिए सुरक्षित छत भी नहीं बची थी। आर्थिक तंगी के कारण वह कई परेशानियों से गुजर रहा था। छोटी बहन की जिम्मेदारी भी उसके कंधों पर आ गई थी, जिससे उसकी मुश्किलें और बढ़ गईं। भविष्य को लेकर निराशा का माहौल था, लेकिन इसी बीच सरकार की ओर से मिली सहायता ने उसकी जिंदगी बदल दी।

सरकार की योजना के तहत रोहित को बेसहारा बच्चों की श्रेणी में शामिल करते हुए हर महीने 4 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देना शुरू किया गया। इससे उसकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होने लगीं और जीवन कुछ हद तक स्थिर हुआ। यह सहायता उसे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

इसके अलावा सरकार ने रोहित के लिए पक्का घर बनाने हेतु 3 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की। यह राशि तीन किस्तों में दी जा रही है, जिनमें से दो किस्तें उसे मिल चुकी हैं और घर का निर्माण अंतिम चरण में है। जल्द ही उसका अपना पक्का घर तैयार हो जाएगा, जिससे उसकी वर्षों पुरानी समस्या समाप्त हो जाएगी।

रोहित की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपनी बहन की शादी थी, जो आर्थिक तंगी के कारण असंभव लग रही थी। इस स्थिति में भी सरकार ने मदद का हाथ बढ़ाया और बहन की शादी के लिए 2 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की। इस सहयोग से रोहित ने अपनी बहन की शादी सम्मानपूर्वक संपन्न की। सरकार की ओर से यह भी प्रावधान किया गया है कि रोहित को 27 वर्ष की आयु तक जीवनयापन और अन्य आवश्यक सहायता मिलती रहेगी।

इसमें आगे चलकर शादी और आजीविका के लिए भी आर्थिक सहयोग शामिल है। इससे उसका भविष्य सुरक्षित हो रहा है। रोहित ने इस सहायता के लिए सरकार और मुख्यमंत्री का आभार जताया है। उसने कहा कि माता-पिता के जाने के बाद उसे लगा था कि उसकी जिंदगी खत्म हो गई, लेकिन सरकारी सहायता ने उसे नया जीवन दिया। इस पूरी कहानी ने यह दिखाया है कि जब कोई व्यवस्था मानवीय संवेदनाओं के साथ काम करती है, तो वह किसी भी बेसहारा व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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