हिमाचल की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय सम्मान, डॉ. जोगिन्दर हाब्बी को मिलेगा संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार
हिमाचल की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय सम्मान, डॉ. जोगिन्दर हाब्बी को मिलेगा संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार

Author : Gopal Dutt Sharma

June 11, 2026 4:22 p.m. 1849

हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ा गौरव प्राप्त हुआ है। प्रदेश के प्रसिद्ध लोक कलाकार, शोधकर्ता और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्तित्व डॉ. जोगिन्दर हाब्बी को देश के सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मानों में शामिल संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार-2025 के लिए चयनित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उनकी तीन दशकों से अधिक की समर्पित सेवा के लिए दिया जा रहा है, जिसमें उन्होंने हिमाचल की परंपरागत कला और विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डॉ. जोगिन्दर हाब्बी ने लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। सिरमौर जिले से संबंध रखने वाले हाब्बी ने अपने गुरु पद्मश्री विद्यानंद सरैक के मार्गदर्शन में अनेक विलुप्त होती परंपराओं पर शोध किया। उन्होंने विशेष रूप से ठोडा सहित कई पारंपरिक कलाओं को न केवल संरक्षित किया बल्कि उन्हें आधुनिक मंचीय रूप देकर नई पीढ़ी तक पहुंचाया।

उनके प्रयासों से हिमाचल प्रदेश की कई लोक कलाएं, जो धीरे-धीरे लुप्त होने की कगार पर थीं, आज फिर से जीवंत हो उठी हैं। उन्होंने ठोडा, हाटी की नाटी, सिंहटू नृत्य, बढाल्टू नृत्य और डग्याली नाच जैसी परंपराओं को शोध और प्रशिक्षण के माध्यम से संरक्षित किया। डॉ. हाब्बी ने चूड़ेश्वर सांस्कृतिक मंडल और आसरा संस्था की स्थापना कर सैकड़ों कलाकारों को प्रशिक्षण दिया। उनके निजी प्रयासों से स्थापित हाब्बी मानसिंह कला केंद्र में नियमित रूप से लोक नृत्य और अन्य पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है।

उनके निर्देशन में कई कलाकारों ने विदेशों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। बुल्गारिया, मैसेडोनिया, ग्रीस और तुर्की जैसे देशों में उनके नेतृत्व में प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति को नई पहचान दिलाई। विशेषकर सिरमौर की पारंपरिक कला ठोडा को पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।

उनकी उपलब्धियों को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी मान्यता दी है। उनके नाम पर कई रिकॉर्ड दर्ज हैं और वे लोक कला पर कई शोध पत्र एवं पुस्तकें लिख चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने डॉक्यूमेंट्री फिल्मों और टेलीफिल्म के माध्यम से भी लोक परंपराओं को संरक्षित किया है।

डॉ. हाब्बी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं बल्कि पूरे लोक संस्कृति से जुड़े कलाकारों और हिमाचल की परंपराओं का सम्मान है। उन्होंने अपने गुरुजनों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह सम्मान हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने की प्रेरणा देता है।

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