Author : Rajesh Vyas
पालमपुर विधानसभा क्षेत्र के गोपालपुर स्थित प्राकृतिक चेतना केंद्र और चिड़ियाघर को लेकर एक बार फिर क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है। यहां टाइगर लाए जाने की संभावना की चर्चा के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों में भी उत्साह देखने को मिल रहा है। पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने कहा कि यदि गोपालपुर चिड़ियाघर में टाइगर लाया जाता है तो यह क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी और इससे गोपालपुर चिड़ियाघर को नई पहचान मिल सकती है। पूर्व विधायक ने कहा कि किसी भी चिड़ियाघर में टाइगर पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण होता है। खासकर बच्चे और युवा बाघ को करीब से देखने के लिए ऐसे स्थानों पर बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। ऐसे में गोपालपुर में टाइगर की मौजूदगी से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है।
प्रवीन कुमार के अनुसार गोपालपुर चिड़ियाघर की नींव करीब 35 वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता कुमार ने वर्ष 1990-91 में रखी थी। इसके बाद प्रदेश में कई सरकारें बनीं और अपना कार्यकाल पूरा कर चली गईं, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी यहां टाइगर लाने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि विधायक रहते हुए उन्होंने विधानसभा में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उनका कहना है कि लंबे समय से टाइगर का इंतजार कर रहे गोपालपुर के लिए अब सामने आ रही संभावनाएं एक नई शुरुआत का संकेत देती हैं।
पूर्व विधायक ने कहा कि पिछले कुछ समय से गोपालपुर चिड़ियाघर को बनखंडी स्थानांतरित किए जाने को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब ऐसा लगता है कि इन चर्चाओं पर विराम लग सकता है। उनके मुताबिक गोपालपुर में ही चिड़ियाघर को विकसित करने की संभावना फिर से मजबूत होती दिखाई दे रही है। यदि इसे मौजूदा स्थान पर आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाता है तो पालमपुर और आसपास के क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
प्रवीन कुमार ने बताया कि बनखंडी में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित चिड़ियाघर में देश और विदेश से लाए जाने वाले वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक तथा मौसमी वातावरण के अनुकूल बनाने की व्यवस्था की जा रही है। ऐसे वन्यजीवों को उनके व्यवहार और रहन-सहन को समझने के लिए कुछ समय तक अलग वातावरण में रखने की आवश्यकता हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने सुझाव दिया कि गोपालपुर के प्राकृतिक चेतना केंद्र को Satellite Zoo के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। उनका कहना है कि यदि गोपालपुर को इस तरह विकसित किया जाता है तो यहां वन्यजीवों के लिए बेहतर बाड़े, सुरक्षा व्यवस्था और दूसरी आधारभूत सुविधाएं तैयार करने की आवश्यकता भी पूरी हो सकती है।
पूर्व विधायक के अनुसार यदि बनखंडी आने वाले वन्यजीवों के लिए तैयार की जाने वाली व्यवस्थाओं का लाभ गोपालपुर को भी मिलता है और यहां टाइगर लाने की प्रक्रिया पूरी होती है, तो करीब 35 वर्षों से चले आ रहे इंतजार का अंत हो सकता है। उन्होंने कहा कि Tiger in Gopalpur Zoo की मौजूदगी न केवल चिड़ियाघर के आकर्षण को बढ़ाएगी, बल्कि पूरे पालमपुर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी गति दे सकती है। इससे स्थानीय कारोबार, होटल, परिवहन और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों को भी फायदा मिलने की संभावना है।
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प्रवीन कुमार ने कहा कि यदि गोपालपुर चिड़ियाघर को आधुनिक रूप दिया जाता है और यहां टाइगर समेत अन्य आकर्षक वन्यजीव लाए जाते हैं, तो यह कांगड़ा जिले के पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार द्वारा कांगड़ा को पर्यटन की राजधानी बनाने की घोषणा की गई है। ऐसे में गोपालपुर प्राकृतिक चेतना केंद्र का विकास इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उनका मानना है कि चिड़ियाघर को बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित करने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को लाभ मिलेगा।
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