Author : Rajesh Vyas
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शाहतलाई स्थित सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मुद्दा सामने आया है। मंदिर मार्ग पर संचालित मीट-मांस, मछली और शराब की दुकानों को लेकर श्रद्धालुओं द्वारा जताई जा रही आपत्तियों का संज्ञान लेते हुए हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार से उचित कार्रवाई की मांग की है। अनुराग सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और आस्था को ध्यान में रखते हुए मंदिर के मुख्य मार्ग पर स्थित इन दुकानों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है और यहां स्थित प्राचीन मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। शाहतलाई स्थित सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर भी उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, चंडीगढ़ और देश के अन्य राज्यों से भी भक्त बाबा बालकनाथ के दर्शन करने आते हैं। विशेष रूप से चैत्र मास के मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
अनुराग ठाकुर ने बताया कि उन्हें कई श्रद्धालुओं ने ईमेल और अन्य माध्यमों से अपनी चिंताओं से अवगत करवाया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर के मुख्य मार्ग पर मौजूद मीट-मांस, मछली और शराब की दुकानों के कारण धार्मिक वातावरण प्रभावित होता है और उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की मांग है कि इन दुकानों को मंदिर मार्ग से हटाकर किसी दूसरे स्थान पर स्थापित किया जाए, ताकि मंदिर क्षेत्र की पवित्रता और धार्मिक वातावरण बना रहे।
सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि बाबा बालकनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। श्रद्धालु वर्षों से अपनी धार्मिक परंपराओं और भावनाओं के साथ इस पवित्र स्थल पर पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के आसपास का वातावरण भी वहां की परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप होना चाहिए। इससे भक्तों को बेहतर धार्मिक अनुभव मिलेगा और मंदिर की गरिमा भी बनी रहेगी।
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अनुराग ठाकुर ने कहा कि धार्मिक स्थलों के आसपास श्रद्धालुओं की आस्था, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करेगी और जल्द आवश्यक कदम उठाएगी।
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