Author : Rajesh Vyas
हिमाचल प्रदेश। हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने की मांग को लेकर भाजपा विधि प्रकोष्ठ ने प्रदेश सरकार से सख्त और कानूनसम्मत कदम उठाने की अपील की है। भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक अरविंद शर्मा और जिला संयोजक मनोज शर्मा ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में नशा तस्करी, पुलिस व्यवस्था, कानूनी कार्रवाई और युवाओं के पुनर्वास से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए। उन्होंने मांग की कि प्रदेश सरकार NDPS Act के तहत दंड व्यवस्था की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखे, ताकि नशा तस्करी के मामलों में प्रभावी कार्रवाई और शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
अरविंद शर्मा और मनोज शर्मा ने NDPS Act के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन की पहल का स्वागत किया। उन्होंने प्रदेश सरकार और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विशेष अदालतें मामलों के शीघ्र निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।उन्होंने कहा कि केवल विशेष अदालतें स्थापित करना पर्याप्त नहीं है। इन अदालतों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने, प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट समय पर प्राप्त करने की व्यवस्था भी जरूरी है। इससे मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी कम करने और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मामलों में आरोप सिद्ध हों, उनमें संबंधित कानून के प्रावधानों के अनुसार दंड दिया जाना चाहिए।
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पत्रकार वार्ता के दौरान बिंद्राबन में पहले स्थापित पुलिस चौकी को बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। भाजपा नेताओं ने सवाल किया कि चौकी किन कारणों से बंद की गई और इस निर्णय के पीछे क्या परिस्थितियां थीं। उन्होंने प्रदेश सरकार, स्थानीय विधायक और पुलिस विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उनके अनुसार, क्षेत्र की सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस चौकी दोबारा खोलने या पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने पर विचार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही नियमित गश्त और प्रभावी निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई।
भाजपा विधि प्रकोष्ठ के नेताओं ने कहा कि चिट्टा बेचने वालों, संगठित तस्करी में शामिल व्यक्तियों और बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि मौजूदा दंड व्यवस्था की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए। उनका कहना था कि आवश्यक विधायी संशोधनों पर विचार करते समय संविधान, निष्पक्ष सुनवाई और कानून के स्थापित सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही, प्रदेश सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में कानूनी और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के प्रयास तेज करे।
शिक्षण संस्थानों, कॉलेजों और छात्रावासों के आसपास मादक पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए भाजपा नेताओं ने विशेष पुलिस दल गठित करने की मांग की। उन्होंने नियमित निगरानी, खुफिया सूचनाओं के संकलन और नशे की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क के विरुद्ध साक्ष्य-आधारित कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने पार्सल बुकिंग, भुगतान के तरीकों, मादक पदार्थों के स्रोत और आपूर्ति नेटवर्क की गहन जांच करने की भी मांग की। उनका कहना था कि नशे के अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति के संबंध में प्रथमदृष्टया आधार मिलने पर NDPS Act और अन्य लागू कानूनों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसी कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया और कानून में उपलब्ध सुनवाई तथा अपील के अधिकारों के अनुरूप होनी चाहिए।
भाजपा नेताओं ने कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में नमूनों की जांच और रिपोर्ट मिलने में देरी जांच तथा अभियोजन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसलिए फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने और रिपोर्ट समयबद्ध उपलब्ध कराने की व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने मकान मालिकों और व्यापारियों से भी अपील की कि वे किरायेदारों का उचित सत्यापन करें और अपने परिसर का उपयोग किसी अवैध गतिविधि के लिए न होने दें। यदि चिट्टा या अन्य मादक पदार्थों की बिक्री अथवा तस्करी की जानकारी मिले, तो पुलिस को सूचित कर जांच में सहयोग करें। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मकान या दुकान का मालिक होने अथवा किरायेदारी के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जाना चाहिए। जिम्मेदारी का निर्धारण साक्ष्यों और कानून के अनुसार होना चाहिए।
भाजपा विधि प्रकोष्ठ ने नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के उपचार और पुनर्वास को भी महत्वपूर्ण बताया। नेताओं ने मांग की कि उपमंडल स्तर पर गुणवत्तापूर्ण नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाएं, ताकि प्रभावित युवाओं को समय पर उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि उपचार के बाद युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और परिवार का सहयोग उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। इससे उन्हें दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने और समाज की मुख्यधारा में लौटने में मदद मिल सकती है।
अरविंद शर्मा ने कहा कि नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल प्रशासन या पुलिस तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सामाजिक, धार्मिक और जनकल्याणकारी संस्थाओं, व्यापार मंडलों, पंचायतों और आम नागरिकों को भी इस अभियान में भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के बीच नियमित समन्वय बैठकों की जरूरत बताई। साथ ही पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने, नशा तस्करी से संबंधित मामलों की समीक्षा करने और नागरिकों के लिए सुरक्षित एवं गोपनीय शिकायत व्यवस्था उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आरोप लगने और दोष सिद्ध होने के बीच कानूनी अंतर का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल आरोप या जांच लंबित होने के आधार पर सामाजिक उत्पीड़न या बहिष्कार नहीं होना चाहिए।
अरविंद शर्मा ने कहा कि पहाड़ की युवा शक्ति हिमाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण संपत्ति है और उसे नशे की गिरफ्त से बचाना पूरे समाज का साझा दायित्व है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मौजूदा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन करने, तस्करी के स्रोतों पर कार्रवाई तेज करने और आवश्यक कानूनी सुधारों के लिए केंद्र सरकार से पहल करने की मांग की। पत्रकार वार्ता में जिला भाजपा अध्यक्ष अरविंद मेहता, जिला सह-संयोजक विशाल ठाकुर और प्रदेश लीगल सेल की सदस्य मनीषा शर्मा भी उपस्थित रहे।
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