Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से बेरोजगारी को लेकर चर्चा होती रही है। अक्सर यह कहा जाता है कि राज्य में युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन जब जमीनी स्तर पर स्थिति को देखा जाता है तो एक अलग तस्वीर सामने आती है। प्रदेश के बाजारों, निर्माण स्थलों, होटलों, खेतों, बागानों, कार्यशालाओं और छोटे-बड़े व्यवसायों में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आए लोग काम करते नजर आते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वास्तव में रोजगार की कमी है या फिर काम को लेकर समाज और युवाओं की सोच में बदलाव आया है।
आज प्रदेश में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां लगातार काम के अवसर उपलब्ध हैं। राजमिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर, पेंटर, वाहन मरम्मत, सिलाई, कृषि और बागवानी जैसे अनेक व्यवसायों में बाहरी राज्यों के लोग मेहनत कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई स्थानीय युवा केवल सरकारी नौकरी मिलने की प्रतीक्षा में वर्षों तक तैयारी करते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार केवल सरकारी पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी क्षेत्र और स्वयं के व्यवसाय में भी बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं।
जानकारों के अनुसार प्रदेश में स्वरोजगार के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं। कृषि, बागवानी, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और पर्यटन से जुड़े कार्य युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकते हैं। इसके अलावा आधुनिक समय में तकनीक आधारित सेवाओं और ऑनलाइन माध्यमों से भी रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं। यदि युवा इन क्षेत्रों में रुचि लें तो वे न केवल खुद के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बदलती जीवनशैली ने युवाओं की प्राथमिकताओं को प्रभावित किया है। आज कई युवा ऐसे कार्यों से दूरी बना रहे हैं जिनमें अधिक शारीरिक मेहनत की आवश्यकता होती है। समाज में भी कई बार कुछ व्यवसायों को कम महत्व दिया जाता है, जबकि वही कार्य दूसरे राज्यों से आए लोग पूरी लगन और मेहनत से कर रहे हैं। इसी कारण वे आर्थिक रूप से आगे बढ़ने में सफल हो रहे हैं। कौशल विकास और व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी भी इस स्थिति का एक कारण मानी जाती है।
दूसरे राज्यों से आने वाले लोग किसी भी प्रकार का कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं। वे छोटे स्तर से शुरुआत कर धीरे-धीरे अपने काम का विस्तार करते हैं। समय का सदुपयोग, मेहनत और निरंतर प्रयास उनकी सफलता का आधार बनते हैं। यही कारण है कि कई प्रवासी श्रमिक बाद में छोटे कारोबारी या ठेकेदार के रूप में स्थापित हो जाते हैं। वे अवसरों की तलाश करते हैं और उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग करने की कोशिश करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदेश के युवा कृषि, बागवानी और स्थानीय संसाधनों पर आधारित व्यवसायों की ओर ध्यान दें तो रोजगार के अनेक अवसर स्वयं तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए केवल सरकारी योजनाएं ही नहीं बल्कि परिवार, समाज और युवाओं की सोच में भी सकारात्मक बदलाव आवश्यक है। युवाओं को नए कौशल सीखने, तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने और स्वरोजगार के अवसरों को अपनाने के लिए आगे आना होगा।
बेरोजगारी की चुनौती से निपटने के लिए केवल सरकार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थानों को भी युवाओं को विभिन्न प्रकार के व्यवसायों और कौशल आधारित कार्यों के प्रति प्रेरित करना होगा। मेहनत को सम्मान देने और हर कार्य को समान दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। इससे युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे नए अवसरों की तलाश कर सकेंगे।
हिमाचल की पहचान मेहनती और ईमानदार लोगों की रही है। यदि युवा आधुनिक तकनीक, नए कौशल और आत्मनिर्भरता की भावना को अपनाएं तो प्रदेश में रोजगार की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी कार्य को छोटा या बड़ा समझने के बजाय उसे अवसर के रूप में देखा जाए। मेहनत और समर्पण के साथ किया गया हर कार्य सफलता का मार्ग खोल सकता है। यही सोच भविष्य में प्रदेश को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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