संगीत साधना जीवनभर की यात्रा, रियाज से निखरती है कलाकार की प्रतिभा: डॉ. सुरेश शर्मा
संगीत साधना जीवनभर की यात्रा, रियाज से निखरती है कलाकार की प्रतिभा: डॉ. सुरेश शर्मा

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Oct. 14, 2026 1:24 p.m. 127

हमीरपुर, 14 अक्टूबर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल राजकीय महाविद्यालय (NSCBM), हमीरपुर में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU), शिमला के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय अंतर-महाविद्यालय युवा उत्सव ग्रुप-II (संगीत) के दूसरे दिन संगीत प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रदेशभर से पहुंचे विद्यार्थियों ने अपनी गायन प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संगीत की मधुर धुनों और प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों से महाविद्यालय परिसर का माहौल सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा। कार्यक्रम में डॉ. सुरेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिंह ने उनका स्वागत किया और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, संगीत शिक्षकों, निर्णायक मंडल के सदस्यों और आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

संगीत के लिए निरंतर अभ्यास और समर्पण जरूरी

मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि जीवनभर चलने वाली साधना और तपस्या है। उन्होंने कहा कि किसी कलाकार की प्रतिभा को निखारने में नियमित रियाज, मेहनत और समर्पण की अहम भूमिका होती है। संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए लगातार सीखते रहना और अभ्यास जारी रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवा उत्सव विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ दूसरे कलाकारों से सीखने का अवसर भी देता है। ऐसे मंच युवाओं को अपनी कला को बेहतर बनाने और संगीत की विभिन्न विधाओं को समझने में मदद करते हैं। डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों से संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाने और इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने आयोजन से जुड़े महाविद्यालय प्रशासन, प्राचार्या, शिक्षकों, संगीत प्रशिक्षकों और आयोजन समिति का आभार भी व्यक्त किया।

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प्राचार्या ने बताया सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिंह ने कहा कि अंतर-महाविद्यालय युवा उत्सव विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता और प्रतिभा सामने लाने का अवसर प्रदान करता है। इन आयोजनों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अलग-अलग महाविद्यालयों के प्रतिभागियों के साथ सांस्कृतिक अनुभव साझा करने का मौका मिलता है। उन्होंने बताया कि पांच दिवसीय आयोजन के सफल संचालन के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। प्रतिभागियों, निर्णायक मंडल और अलग-अलग महाविद्यालयों से आई टीमों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि प्रतियोगिताएं व्यवस्थित ढंग से आयोजित हो सकें।

दूसरे दिन हल्के भारतीय गायन और लोकगीत प्रतियोगिताएं

आयोजन सचिव डॉ. पूनम शर्मा ने बताया कि युवा उत्सव के दौरान प्रतिदिन संगीत की अलग-अलग विधाओं से संबंधित प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। 13 अक्टूबर को उत्सव के पहले दिन शास्त्रीय गायन (एकल) और शास्त्रीय वाद्य संगीत की प्रतियोगिताएं हुईं। शास्त्रीय वाद्य संगीत में ताल वाद्य और गैर-ताल वाद्य की श्रेणियां शामिल रहीं। 14 अक्टूबर को दूसरे दिन हल्का भारतीय गायन (एकल) और लोकगीत प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपनी गायन शैली, सुरों और संगीत की समझ का प्रदर्शन किया। लोकगीत प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रदेश और देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी संगीत परंपराओं को मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

17 अक्टूबर को पुरस्कार वितरण के साथ होगा समापन

डॉ. पूनम शर्मा के अनुसार, युवा उत्सव का कार्यक्रम 17 अक्टूबर तक चलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, 15 अक्टूबर को पाश्चात्य गायन (एकल) और पाश्चात्य वाद्य संगीत (एकल) की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। 16 अक्टूबर को भारतीय समूह गीत और पाश्चात्य समूह गीत प्रतियोगिताएं होंगी। 17 अक्टूबर को लोक ऑर्केस्ट्रा प्रतियोगिता के साथ पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के प्रदर्शन के आधार पर विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।

प्रदेश के 42 महाविद्यालयों के करीब 500 विद्यार्थी ले रहे भाग

इस पांच दिवसीय संगीत युवा उत्सव में हिमाचल प्रदेश के लगभग 42 महाविद्यालयों के करीब 500 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी से आयोजन को अंतर-महाविद्यालय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का व्यापक मंच मिला है। गौरतलब है कि युवा उत्सव का शुभारंभ 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार इंजीनियर सुनील शर्मा ‘बिट्टू’ की उपस्थिति में हुआ था। अब 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में संगीत की विभिन्न विधाओं की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, आयोजन समिति के सदस्य, निर्णायक मंडल और विद्यार्थी इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बने हुए हैं।

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