Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला के प्रसिद्ध Wildflower Hall को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद के बाद राज्य को इस संपत्ति से आर्थिक लाभ मिला है और करीब 401 करोड़ रुपये हिमाचल के खजाने तक पहुंचे हैं। उन्होंने इसे प्रदेश की महत्वपूर्ण संपत्ति बताते हुए कहा कि सरकार ने इसके हितों की रक्षा के लिए कानूनी स्तर पर मजबूती से अपना पक्ष रखा। मुख्यमंत्री का यह बयान उस लंबे विवाद की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें हिमाचल प्रदेश सरकार और East India Hotels Limited के बीच होटल के स्वामित्व, प्रबंधन, हिस्सेदारी और संपत्ति से जुड़े अधिकारों को लेकर वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चली। अदालत के रिकॉर्ड में भी इस मामले में राज्य द्वारा होटल की संपत्ति पर कब्जा और प्रबंधन संभालने से संबंधित कार्यवाही दर्ज है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार को करीब 23 वर्षों तक इस होटल से कोई वित्तीय लाभ नहीं मिला। उनके मुताबिक, कानूनी लड़ाई के बाद राज्य को लगभग 401 करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ हुआ है। हालिया रिपोर्ट में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि होटल से राज्य को हर साल करीब 24 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है। इसका अर्थ करीब 2 करोड़ रुपये मासिक आय के बराबर है। सरकार की ओर से पेश किए गए इस आंकड़े को मुख्यमंत्री के बयान के रूप में देखा जाना चाहिए। यह होटल की कुल व्यावसायिक आय के बजाय राज्य को होने वाले वित्तीय लाभ से संबंधित दावा है।
Wildflower Hall Shimla को लेकर 14 अक्टूबर 2025 के हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश में राज्य को संयुक्त उपक्रम कंपनी के बैंक बैलेंस, शेयरहोल्डिंग और पूंजी से जुड़े कुछ अधिकारों का एकमात्र मालिक घोषित किया गया था। अदालत के आदेश के अनुसार, संयुक्त उपक्रम कंपनी के करीब 320 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस को राज्य को हस्तांतरित किया जाना था। इसके अलावा मध्यस्थता के फैसले के तहत 25 करोड़ रुपये का भुगतान और संयुक्त उपक्रम में East India Hotels की हिस्सेदारी राज्य को हस्तांतरित करने से जुड़े निर्देश भी दिए गए थे। इन्हीं अलग-अलग वित्तीय मदों को मिलाकर करीब 401 करोड़ रुपये का आंकड़ा सामने आया था।
इस विवाद की जड़ें कई वर्ष पुरानी हैं। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकार और East India Hotels के बीच 30 अक्टूबर 1995 को संयुक्त उपक्रम समझौता हुआ था। इसका उद्देश्य Wildflower Hall को विकसित करके होटल के रूप में संचालित करना था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौते की शर्तों, प्रबंधन और अन्य अधिकारों को लेकर विवाद बढ़ता गया। मध्यस्थता प्रक्रिया के बाद मामला अदालतों तक पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी कार्यवाही जारी रही। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिसमें East India Hotels को होटल की संपत्ति का कब्जा राज्य को सौंपने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, कंपनी को 31 मार्च 2025 तक होटल का कब्जा और प्रबंधन जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी 2024 के आदेश के बाद East India Hotels को 31 मार्च 2025 तक संपत्ति का कब्जा बनाए रखने की अनुमति थी। इसके बाद राज्य ने होटल की संपत्ति का भौतिक कब्जा संभाला। यह घटनाक्रम हिमाचल सरकार और होटल कंपनी के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण चरण रहा। इसके बाद वित्तीय खातों और संयुक्त उपक्रम की संपत्तियों से संबंधित दावों को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया चलती रही। इसलिए इस मामले को केवल होटल के संचालन से जुड़ा विवाद नहीं, बल्कि स्वामित्व, वित्तीय अधिकारों और प्रबंधन से जुड़ा लंबा कानूनी मामला माना जाता है।
Wildflower Hall Hotel शिमला के प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। ऐसे में इस संपत्ति से राज्य को मिलने वाला वित्तीय लाभ हिमाचल प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस संपत्ति से अब राज्य को नियमित आय भी मिल रही है। हालिया बयान में उन्होंने करीब 24 करोड़ रुपये सालाना आय का उल्लेख किया। सरकार का तर्क है कि लंबे समय तक कानूनी विवाद में फंसी संपत्ति से अब राज्य को वित्तीय लाभ मिलना शुरू हुआ है। दूसरी ओर, होटल से जुड़े कानूनी विवाद के विभिन्न पहलुओं पर न्यायिक रिकॉर्ड में पक्षकारों के दावे और कार्यवाही दर्ज हैं।
Wildflower Hall का इतिहास काफी पुराना है। 1993 में होटल की पुरानी इमारत आग में क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने इसे विकसित करने के लिए East India Hotels के साथ संयुक्त उपक्रम की व्यवस्था की थी। 30 अक्टूबर 1995 को राज्य सरकार और East India Hotels के बीच संयुक्त उपक्रम समझौता हुआ। इसी व्यवस्था के तहत Mashobra Resort Limited का गठन किया गया और होटल को विकसित करके संचालित किया गया। समय के साथ दोनों पक्षों के बीच समझौते की शर्तों और अधिकारों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जो अंततः मध्यस्थता और विभिन्न न्यायिक मंचों तक पहुंचा।
मुख्यमंत्री के हालिया बयान के अनुसार, सरकार अब इस संपत्ति से नियमित आर्थिक लाभ प्राप्त करने की स्थिति में है। उन्होंने इसे हिमाचल प्रदेश की बहुमूल्य संपदा बताते हुए कहा कि सरकार ने इसके हितों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। हालांकि, होटल की संपत्ति और उससे जुड़े वित्तीय मामलों में अदालत की कार्यवाही के अलग-अलग चरण रहे हैं। इसलिए 401 करोड़ रुपये के आंकड़े को उस न्यायिक और वित्तीय व्यवस्था के संदर्भ में समझना जरूरी है, जिसके तहत राज्य को संयुक्त उपक्रम की संपत्तियों और वित्तीय हिस्से पर अधिकार मिला।
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