सोलन में बंदर-जंगली सुअरों से किसान परेशान

Author : Sourabh Jain

जिला सोलन के पहाड़ी क्षेत्र रामशहर, भेहड़ी और धमाणा पंचायतों में बंदरों का आतंक और जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान ने किसानों और बागवानों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों के अनुसार बंदर दिन के समय खेतों और बगीचों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि रात होते ही जंगली सुअरों के झुंड खेतों में घुसकर खड़ी फसल को तहस-नहस कर देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से जारी इस समस्या के कारण खेती करना उनके लिए चुनौती बनता जा रहा है। करीब 500 बीघा उपजाऊ भूमि और सैकड़ों परिवार फसल नुकसान की समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं।

दिन में बंदर, रात में जंगली सुअरों का कहर

किसानों के मुताबिक बंदरों के झुंड दिनभर खेतों और बगीचों के आसपास घूमते रहते हैं। मौका मिलते ही वे फसलों और फलदार पौधों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं रात के समय जंगली सुअर खेतों में घुस जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगली सुअर खेतों में तैयार फसलों को रौंदने के साथ-साथ जमीन खोदकर भी फसल को बर्बाद कर देते हैं। इस दोहरी समस्या के कारण किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए दिन-रात निगरानी करनी पड़ रही है।

500 बीघा जमीन पर खेती करना बना चुनौती

ग्रामीणों के अनुसार रामशहर, भेहड़ी और धमाणा पंचायतों में लगभग 500 बीघा उपजाऊ भूमि इस समस्या से प्रभावित है। कई परिवारों की आजीविका खेती और बागवानी पर निर्भर है, ऐसे में जंगली जानवरों से फसल नुकसान सीधे उनकी आमदनी पर असर डाल रहा है। किसानों का कहना है कि मेहनत और खर्च करने के बाद जब फसल तैयार होती है तो जंगली जानवर उसे नष्ट कर देते हैं। इससे किसानों में निराशा बढ़ रही है और खेती छोड़ने की चिंता भी सामने आने लगी है।

मोर समेत अन्य जंगली जानवर भी पहुंचा रहे नुकसान

ग्रामीणों ने बताया कि केवल बंदर और जंगली सुअर ही समस्या नहीं हैं। मोर और अन्य जंगली जानवर भी खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का कहना है कि अलग-अलग समय पर अलग-अलग जंगली जानवर खेतों में पहुंचते हैं, जिससे लगातार निगरानी रखना मजबूरी बन गया है।

सरकार और वन विभाग से समाधान की मांग

ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार, वन विभाग और संबंधित मंत्रियों एवं अधिकारियों से इस समस्या का जल्द स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। किसानों का कहना है कि Monkey Problem in Himachal और जंगली सुअरों से जुड़ी समस्या का समाधान केवल किसानों के स्तर पर संभव नहीं है। उन्होंने संबंधित विभागों से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने, किसानों की समस्या समझने और फसल सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में खेती और बागवानी पर इसका और गंभीर असर पड़ सकता है।

सड़क और अन्य स्थानीय समस्याएं भी उठाईं

ग्रामीणों ने बंदरों और जंगली सुअरों की समस्या के साथ-साथ क्षेत्र से जुड़ी सड़क और निगम संबंधी समस्याओं को भी उठाया है। उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों और ग्रामीणों को कई तरह की स्थानीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग इन समस्याओं को गंभीरता से लें और क्षेत्र के विकास तथा किसानों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

रामशहर क्षेत्र की प्रमुख जानकारी

रामशहर, भेहड़ी और धमाणा पंचायतें जिला सोलन के पहाड़ी क्षेत्र में आती हैं। इन पंचायतों में खेती और बागवानी करने वाले ग्रामीणों के सामने बंदरों और जंगली सुअरों की समस्या प्रमुख चिंता बनती जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 500 बीघा कृषि भूमि और सैकड़ों परिवार प्रभावित हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सोलन में किसान किस समस्या से परेशान हैं?

रामशहर, भेहड़ी और धमाणा पंचायतों के किसान बंदरों, जंगली सुअरों और अन्य जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने से परेशान हैं।

कितनी जमीन प्रभावित बताई जा रही है?

ग्रामीणों के अनुसार करीब 500 बीघा उपजाऊ भूमि इस समस्या से प्रभावित है।

जंगली सुअर फसलों को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?

ग्रामीणों के अनुसार जंगली सुअर रात में खेतों में घुसकर खड़ी फसल को रौंदते और खेत खोदकर फसल नष्ट करते हैं।

Aug. 26, 2026 4:35 p.m. 328
#हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #ताज़ा खबरें #भारत समाचार #भारतीय खबरें
देखें खास वीडियो
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
नेपाल में फंसे हिमाचलियों की जानकारी दें, प्रशासन ने जारी किए निर्देश मणिमहेश यात्रा के पहले दिन 253 श्रद्धालु हुए रवाना, 20 सितंबर तक चलेगी यात्रा हिमाचल में स्वाइन फ्लू की दस्तक, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज हथलौंण की बेटी शिल्पा सोनी का चयन, बंगाणा में बनेंगी रसायन प्रवक्ता