Author : Gopal Dutt Sharma
सिरमौर जिले के राजगढ़ उपमंडल के मडेढ़ा गांव में इन दिनों मक्की की फसल पर सुंडी के प्रकोप की समस्या सामने आई है। फसल में कीटों की बढ़ती संख्या को देखते हुए किसानों में चिंता का माहौल है। किसानों से मिली जानकारी के बाद कृषि विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर खेतों का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मक्की की फसल पर दिखाई दे रही सुंडी फसल को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। समय पर उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो उत्पादन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विभाग की टीम ने किसानों को जागरूक करते हुए वैज्ञानिक तरीके से कीट नियंत्रण करने की सलाह दी।
कृषि विभाग के विषय विशेषज्ञ शिव राम ने खेतों का निरीक्षण करने के बाद किसानों को फसल की सुरक्षा के लिए आवश्यक जानकारी दी। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि कीट नियंत्रण के लिए अनुशंसित दवा का सही समय पर छिड़काव किया जाए।उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में मक्की की फसल बड़ी अवस्था में पहुंच चुकी है, इसलिए प्रभावी नियंत्रण के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा का प्रयोग और सही तरीके से छिड़काव करना जरूरी है। उन्होंने किसानों को बताया कि बेहतर परिणाम के लिए दो पंप स्प्रे करना अधिक प्रभावी रहेगा।
विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि खेतों में नियमित निगरानी रखें और यदि पौधों पर कीटों के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि विभाग से संपर्क करें। शुरुआती चरण में कीटों की पहचान कर नियंत्रण करने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।कृषि विभाग ने किसानों को मक्की की फसल में होने वाली बीमारियों और कीटों की पहचान के बारे में भी जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि बदलते मौसम और कृषि परिस्थितियों के कारण फसलों में कीटों का प्रभाव बढ़ सकता है, इसलिए किसानों को सतर्क रहना चाहिए।
कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं। समय-समय पर खेतों की निगरानी, सही दवा का चयन और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपचार करना फसल उत्पादन को बेहतर बनाने में सहायक होता है।विभाग ने किसानों को भरोसा दिलाया कि फसल संबंधी किसी भी समस्या के समाधान के लिए कृषि विभाग की टीमें लगातार किसानों के संपर्क में रहेंगी। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को जागरूक करके और समय पर आवश्यक कदम उठाकर फॉल आर्मीवर्म जैसे खतरनाक कीटों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
कृषि विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर किसानों को मौके पर जानकारी उपलब्ध कराई और उन्हें उचित प्रबंधन के तरीके बताए। विभाग का उद्देश्य है कि समय रहते किसानों को सहायता मिले ताकि उनकी मेहनत और फसल को नुकसान से बचाया जा सके।विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर स्वयं से दवा का गलत प्रयोग न करें, बल्कि कृषि अधिकारियों की सलाह लेकर ही उपचार करें। इससे फसल की गुणवत्ता बनी रहेगी और उत्पादन में भी सुधार होगा।कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान से किसानों को कीट नियंत्रण के प्रभावी तरीकों की जानकारी मिल रही है और उम्मीद है कि समय रहते किए गए उपायों से मक्की की फसल को नुकसान से बचाया जा सकेगा।
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