Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
शिक्षक दिवस के अवसर पर हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में गुरुजनों के सम्मान से जुड़ी एक सराहनीय पहल सामने आई। सदर विधायक आशीष शर्मा ने क्षेत्र के 90 वर्ष से अधिक आयु वाले सेवानिवृत्त शिक्षकों को उनके घर जाकर सम्मानित किया। इस पहल के जरिए उन्होंने उन बुजुर्ग शिक्षकों के प्रति आभार जताया, जिन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बच्चों को शिक्षा देने और समाज को बेहतर दिशा देने में लगाया। विधायक की ओर से शुरू की गई इस पहल में बुजुर्ग शिक्षकों को उनके घर पर जाकर सम्मान देना खास रहा। आमतौर पर शिक्षक दिवस के कार्यक्रम विद्यालयों या सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं, लेकिन इस बार उम्रदराज गुरुजनों तक स्वयं पहुंचकर उनका सम्मान करने का प्रयास किया गया। इससे सम्मानित शिक्षकों और उनके परिवारों में भी खुशी का माहौल देखने को मिला।
शिक्षक दिवस के मौके पर विधायक आशीष शर्मा ने 90 वर्ष से अधिक उम्र वाले शिक्षकों से उनके घर जाकर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बुजुर्ग शिक्षकों का हालचाल जाना और उनके शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद करते हुए उन्हें सम्मानित किया। इस पहल का उद्देश्य केवल सम्मान देना ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश देना भी माना जा रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुके शिक्षक आज भी अपने पुराने विद्यार्थियों और शिक्षा के दिनों की यादों को संजोए हुए हैं।
इसी कड़ी में उखली गांव के सेवानिवृत्त शिक्षक ब्रह्म दास शर्मा से भी विधायक ने उनके घर जाकर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शिक्षक से बातचीत की और उनके अनुभवों के बारे में जाना। ब्रह्म दास शर्मा ने विधायक आशीष शर्मा की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग शिक्षकों को उनके घर जाकर सम्मान देना अपने आप में भावनात्मक और सम्मानजनक कदम है। शिक्षक के आशीर्वाद से यह मुलाकात और भी विशेष बन गई। यह पल इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि एक तरफ वह शिक्षक थे, जिन्होंने लंबे समय तक विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार दिए, वहीं दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने उनके घर पहुंचे।
हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में हुई यह पहल समाज में गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षकों के योगदान को याद करने का संदेश देती है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण और भविष्य की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बुजुर्ग शिक्षकों का सम्मान करने से समाज में यह संदेश भी जाता है कि उनके योगदान को केवल नौकरी के वर्षों तक सीमित नहीं समझा जाना चाहिए। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके अनुभव और जीवन की सीख समाज के लिए उपयोगी हो सकती है।
उखली गांव में सेवानिवृत्त शिक्षक ब्रह्म दास शर्मा और विधायक आशीष शर्मा की मुलाकात का दृश्य भावुक करने वाला रहा। शिक्षक ने विधायक की पहल की सराहना करते हुए उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। आशीष शर्मा विधायक की इस पहल को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि बुजुर्ग शिक्षकों के घर जाकर उनका सम्मान करना समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला कदम है।
गुरुजनों का सम्मान भारतीय समाज और संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा रही है। शिक्षक दिवस इसी भावना को और मजबूत करने का अवसर देता है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को यह समझने का अवसर मिलता है कि उनके जीवन को दिशा देने वाले शिक्षकों का सम्मान करना क्यों जरूरी है। वहीं, 90 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों को सम्मानित करने की पहल उनके जीवनभर के योगदान को याद करने का एक माध्यम भी बनी। लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं देने वाले इन शिक्षकों के अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश शिक्षक दिवस के अवसर पर हमीरपुर में हुई यह पहल केवल एक औपचारिक सम्मान कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही। घर जाकर बुजुर्ग शिक्षकों से मिलना, उनका हालचाल पूछना और उनका आशीर्वाद लेना इस पूरे कार्यक्रम को भावनात्मक रूप देता है। शिक्षक दिवस पर ऐसे प्रयास समाज में वरिष्ठ नागरिकों और शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत कर सकते हैं। साथ ही यह संदेश भी सामने आता है कि जिन्होंने समाज और शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित किया, उनके योगदान को याद रखना सभी की जिम्मेदारी है।
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