Author : Prem Sagar
कुल्लू जिले की सैंज घाटी की बनोगी कोठी के पटाहरा गांव में भादों अमावस्या के अवसर पर सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा का भव्य आयोजन किया गया। माता दुर्गा बनोगी देहूरी के पावन स्थल पर आयोजित Hoom Festival में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था और पारंपरिक देव संस्कृति का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की प्रार्थना की। इसके साथ ही लोगों ने क्षेत्र को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने और गांव-समाज में समृद्धि बनाए रखने की कामना की।
Patahra Village में आयोजित इस धार्मिक उत्सव की सबसे खास पहचान पारंपरिक मशाल यात्रा रही। रात के समय जब सैकड़ों जलती हुई मशालें एक साथ प्रज्वलित हुईं तो पूरा क्षेत्र एक अलग ही आध्यात्मिक वातावरण में बदल गया। इस दौरान करीब 40 फुट लंबी विशाल मशाल को हारियानों ने अपने कंधों पर उठाया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मशाल को पंडीर ऋषि मंदिर की परिक्रमा करवाई गई। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे। मशालों की रोशनी, धार्मिक जयकारों और देव परंपराओं के बीच पूरा गांव देर रात तक भक्तिमय बना रहा।
उत्सव के दौरान देव नाटी का आयोजन भी हुआ। स्थानीय लोगों ने पारंपरिक तरीके से नृत्य और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। रातभर देव गीतों और धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला चलता रहा। Sainj Valley की लोक संस्कृति में देव परंपराओं का विशेष स्थान है। यहां होने वाले ऐसे आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्थानीय समाज को अपनी पुरानी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी काम करते हैं।
Mata Durga Banogi के इस आयोजन में पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में माथा टेका और क्षेत्र की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। लोगों ने परिवारों में सुख-शांति, अच्छी फसल, समृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा की कामना की। ग्रामीणों के लिए यह आयोजन पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का हिस्सा है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए पहुंचे।
Banogi Kothi की यह परंपरा हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और देव आस्था को सामने लाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में देव परंपराओं से जुड़े उत्सव सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। Himachal Dev Culture में मशाल यात्रा, देव नाटी, मंदिर परिक्रमा और सामूहिक धार्मिक अनुष्ठानों का अपना विशेष महत्व है। पटाहरा गांव का हूम उत्सव भी इसी विरासत को आगे बढ़ाने वाला आयोजन है।
स्थानीय स्तर पर आयोजित ऐसे धार्मिक उत्सवों के माध्यम से पुरानी परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंचती हैं। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवा भी इन धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं और सदियों पुरानी देव संस्कृति को करीब से समझते हैं। पटाहरा गांव में भादों अमावस्या पर हुआ यह Hoom Festival भी इसी सांस्कृतिक निरंतरता का उदाहरण रहा। मशालों की रोशनी, देव नाटी, मंदिर की परिक्रमा और धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।
पटाहरा गांव का हूम उत्सव भादों अमावस्या के अवसर पर आयोजित होने वाला पारंपरिक धार्मिक आयोजन है। इसमें माता दुर्गा की पूजा, मशाल यात्रा, मंदिर की परिक्रमा, देव नाटी और धार्मिक अनुष्ठान प्रमुख आकर्षण रहते हैं।
यह धार्मिक आयोजन हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की सैंज घाटी की बनोगी कोठी के पटाहरा गांव में माता दुर्गा बनोगी देहूरी और पंडीर ऋषि मंदिर से जुड़ी पारंपरिक देव परंपराओं के तहत आयोजित किया गया।
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